हरियाणा के जिलों की हालिया प्रति व्यक्ति आय के आँकड़े राज्य के भीतर आर्थिक असमानता की स्पष्ट तस्वीर पेश करते हैं। औद्योगिक और शहरी जिलों में आमदनी का स्तर ऊँचा है, जबकि कई कृषि-प्रधान और अपेक्षाकृत पिछड़े इलाकों में आय काफी कम बनी हुई है।

सबसे आगे गुरुग्राम है, जहाँ प्रति व्यक्ति आय 6,81,085 रुपये दर्ज की गई है। इसके बाद फरीदाबाद 3,28,083 रुपये और पानीपत 2,81,365 रुपये के साथ क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। पंचकूला में प्रति व्यक्ति आय 2,42,541 रुपये और अंबाला में 1,97,256 रुपये दर्ज की गई है।

मध्यम श्रेणी के जिलों में रेवाड़ी (1,78,493 रुपये), झज्जर (1,75,949 रुपये), कुरुक्षेत्र (1,73,694 रुपये), सोनीपत (1,71,697 रुपये), रोहतक (1,53,276 रुपये) और करनाल (1,51,608 रुपये) शामिल हैं। इन जिलों में कृषि, लघु उद्योग और सेवा क्षेत्र के संतुलित योगदान से आय स्थिर स्तर पर बनी हुई है।

कैथल में प्रति व्यक्ति आय 1,38,403 रुपये, यमुनानगर में 1,35,658 रुपये, हिसार में 1,29,135 रुपये और फतेहाबाद में 1,29,068 रुपये दर्ज की गई है। सिरसा (1,27,881 रुपये), जींद (1,27,768 रुपये) और महेंद्रगढ़ (1,24,535 रुपये) भी इसी दायरे में आते हैं।

आय के मामले में चरखी दादरी 1,17,759 रुपये और भिवानी 1,11,188 रुपये पर हैं, जबकि पलवल में यह 90,602 रुपये दर्ज की गई है। सबसे निचले स्थान पर नूंह है, जहाँ प्रति व्यक्ति आय 68,848 रुपये आंकी गई है।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि जहाँ औद्योगिक निवेश, निजी क्षेत्र की भागीदारी, बेहतर सड़क व परिवहन व्यवस्था और शहरीकरण हुआ है, वहाँ आय का स्तर तेजी से बढ़ा है। इसके विपरीत जिन जिलों में बड़े उद्योगों की कमी, सीमित रोजगार अवसर और कौशल विकास का अभाव है, वहाँ आय अपेक्षाकृत कम बनी हुई है।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण, औद्योगिक इकाइयों की स्थापना और बुनियादी ढाँचे के विस्तार पर ध्यान देकर कम आय वाले जिलों में आर्थिक स्थिति को बेहतर किया जा सकता है। संतुलित क्षेत्रीय विकास की दिशा में ठोस कदम उठाने से राज्य की समग्र प्रगति को नई गति मिल सकती है।