शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने छोटे सेब बागवानों को बड़ी राहत देते हुए मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (एमआईएस) के नियमों में अहम बदलाव किया है। संयुक्त किसान मंच की मांग को स्वीकार करते हुए सरकार ने तय किया है कि एमआईएस के तहत 100 बोरियों से कम सेब बेचने वाले बागवानों से अब राजस्व अभिलेख नहीं मांगे जाएंगे।
सरकार के निर्देश के बाद हिमाचल प्रदेश बागवानी उपज विपणन एवं प्रसंस्करण निगम (एचपीएमसी) ने बुधवार को इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी। इसके अनुसार एमआईएस सीजन 2025 में निगम के खरीद केंद्रों पर 100 से कम सेब की बोरियां लाने वाले किसानों को केवल फ्रूट रसीद के आधार पर भुगतान किया जाएगा। ऐसे मामलों में खतौनी, जमाबंदी या अन्य भूमि दस्तावेज प्रस्तुत करना जरूरी नहीं होगा।
हालांकि, जिन बागवानों द्वारा 100 या उससे अधिक बोरियां बेची जाएंगी, उनसे पहले की तरह राजस्व रिकॉर्ड लिया जाएगा और भुगतान की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं होगा।
संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान ने सरकार के इस फैसले को छोटे और सीमांत बागवानों के हित में बताया है। उन्होंने कहा कि राजस्व दस्तावेजों की अनिवार्यता के कारण छोटे किसानों को काफी परेशानी होती थी और भुगतान भी देर से मिलता था। यह मुद्दा मंच ने बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी के समक्ष रखा था, जिस पर सरकार ने सकारात्मक रुख अपनाया।
हरीश चौहान के अनुसार इस निर्णय से न केवल छोटे बागवानों को सीधी राहत मिलेगी, बल्कि एमआईएस के तहत सेब खरीद की प्रक्रिया भी अधिक सरल, सुगम और पारदर्शी हो सकेगी।