बुलंदशहर। पूर्व विधायक हाजी अलीम के भतीजे सूफियान की हत्या के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए भाजपा नेता पिंटू उर्फ सतेंद्र और उसके दो भाइयों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से वारदात के दौरान छीनी गई मृतक के भाई की लाइसेंसी पिस्टल भी बरामद की है। तीनों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

जमीन विवाद बना हत्या की वजह
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह घटना जमीन से जुड़े विवाद और मौके पर हुई तीखी कहासुनी के बाद हुई। पुलिस लाइन स्थित सभागार में गुरुवार को एसपी सिटी शंकर प्रसाद ने बताया कि चार जनवरी को यह वारदात देहात कोतवाली क्षेत्र में हुई थी।

पैमाइश के दौरान हुआ विवाद
एसपी सिटी के अनुसार, सूफियान अपने भाई अकरम और दोस्त कादिर अली के साथ एक बाग में जमीन की पैमाइश कराने पहुंचा था। इसी दौरान दूसरे पक्ष के लोग भी वहां आ गए और दोनों पक्षों में विवाद शुरू हो गया, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया।

हमले में सूफियान की मौत
मारपीट के दौरान सूफियान को गंभीर चोटें आईं। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। वहीं, अकरम भी बुरी तरह घायल हो गया। हमलावर मौके से अकरम की लाइसेंसी पिस्टल और दो मोबाइल फोन लूटकर फरार हो गए।

भाई की तहरीर पर दर्ज हुई एफआईआर
मामले में मृतक के भाई मो. हुफैजा की शिकायत पर भाजपा नेता पिंटू उर्फ सतेंद्र, उसके भाई भूरा उर्फ रविंद्र और बबलू उर्फ विजय के अलावा तेजपाल और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था।

मुखबिर की सूचना से हुई गिरफ्तारी
पुलिस ने सात जनवरी को मुख्य आरोपी भूरा को गंगेरूआ फ्लाईओवर के पास से गिरफ्तार किया था। इसके बाद आठ जनवरी को मुखबिर की सूचना पर पिंटू और बबलू को मामन रोड स्थित नहर की पटरी के पास से दबोच लिया गया। पूछताछ में आरोपियों ने अपराध में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली।

शराब के नशे में बढ़ा विवाद
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि घटना के समय भूरा शराब के नशे में था। जमीन को लेकर उसकी सूफियान पक्ष से कहासुनी हो गई, जो गाली-गलौज और फिर मारपीट में बदल गई। इसके बाद भूरा ने अपने भाइयों और अन्य साथियों को मौके पर बुला लिया, जिन्होंने लाठी-डंडों से हमला किया।

कमीशन को लेकर था टकराव
पुलिस का कहना है कि जिस बाग की पैमाइश की जा रही थी, उससे सटी जमीन भाजपा नेता पिंटू की बताई जा रही है। आरोप है कि इलाके में होने वाली जमीन की खरीद-फरोख्त पर आरोपी कमीशन लेते थे। आशंका थी कि जमीन किसी और के हाथ चली गई तो उन्हें आर्थिक नुकसान होगा, इसी कारण विरोध किया गया।

संगठनात्मक कार्रवाई पर सवाल
हत्या के मामले में नाम आने के बावजूद भाजपा नेता पिंटू पर अब तक संगठन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इसे लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है। भाजपा के ग्रामीण मंडल अध्यक्ष कृष्णपाल सिंह का कहना है कि उन्होंने मामले की जानकारी वरिष्ठ नेताओं को दे दी है और निर्देश मिलने का इंतजार किया जा रहा है।
फिलहाल, नामजद तेजपाल सहित अन्य फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।