शिमला: मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शनिवार को राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही विभिन्न क्षेत्रीय योजनाओं की प्रगति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए कि लंबित सभी विकास कार्य अगले तीन महीनों के भीतर पूर्ण किए जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की करीब 90 प्रतिशत आबादी ग्रामीण इलाकों में रहती है और इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को प्राथमिकता दी जा रही है।

उन्होंने बताया कि राज्य में चहुंमुखी विकास और ग्रामीण अधोसंरचना की मजबूती सीधे सतत और समावेशी विकास से जुड़ी है। बैठक में पिछड़ा क्षेत्र उप योजना, विधायक क्षेत्र विकास निधि योजना, लोकल एरिया डेवलपमेंट फंड, मुख्यमंत्री ग्राम पथ योजना सहित अन्य विधायक-वित्तपोषित परियोजनाओं की समीक्षा की गई।

मुख्यमंत्री ने चिंता व्यक्त की कि कई छोटे लेकिन जरूरी कार्य जैसे हैंडपंपों की स्थापना, पैदल रास्ते, नाले, सामुदायिक भवन, रिटेनिंग वॉल, फुट ब्रिज, सिंचाई नहर, चाहरदीवारी और गांव की सड़कें अभी भी लंबित हैं। उन्होंने कहा कि ये विकेंद्रित और जरूरत-आधारित कार्य सीधे स्थानीय लोगों से जुड़े हैं और ग्रामीण अधोसंरचना मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

सुक्खू ने बताया कि वर्तमान सरकार की प्राथमिकता प्रणालीगत सुधार और ग्रामीण विकास के लिए स्थायी ढांचा तैयार करना है। उन्होंने कहा कि कई कार्य लंबे समय तक लंबित रहते हैं जबकि उनके लिए धनराशि पहले ही जारी की जा चुकी होती है।

मुख्यमंत्री ने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि 11,064 परियोजनाएं, जिनकी लागत 204 करोड़ रुपये थी, शुरू ही नहीं हुई थीं। वहीं, 16,834 कार्य, जिनकी लागत 348 करोड़ रुपये थी, लंबे समय से निर्माणाधीन थे। पिछले महीनों में अधिकारियों और उपायुक्तों के साथ हुई समीक्षा बैठक में लंबित कार्यों को समयबद्ध पूरा करने के कड़े निर्देश दिए गए।

इसके परिणामस्वरूप अक्तूबर 2025 से 15 जनवरी 2026 के बीच 18,262 छोटे-बड़े विकास कार्य पूरे किए गए, जिससे ग्रामीण जनता को सीधे लाभ मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन कार्यों की निगरानी रियल-टाइम डैशबोर्ड के माध्यम से की जा रही है और फील्ड अधिकारियों को दैनिक रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।

सुक्खू ने कहा कि सरकार पारदर्शी, जरूरत-आधारित और न्यायसंगत विकास को केंद्र में रखते हुए सभी विधानसभा क्षेत्रों में समान विकास सुनिश्चित कर रही है। जल शक्ति विभाग, लोक निर्माण विभाग, खंड विकास कार्यालय और पंचायतों को निर्देश दिए गए हैं कि सभी रुके हुए या धीमी गति से चल रहे कार्यों को तुरंत पूरा किया जाए।

सचिव योजना डॉ. अभिषेक जैन ने बताया कि 11,064 में से 9,689 कार्य, जिनकी लागत 177 करोड़ रुपये थी, तीन महीनों के भीतर पूरे कर लिए गए। वहीं, लंबे समय से निर्माणाधीन 16,384 कार्यों में से 8,573 कार्य पूरे किए गए, जिनकी लागत 159 करोड़ रुपये थी। शेष कार्य अगले तीन महीनों में पूरा करने के मुख्यमंत्री के निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि जमीनी सत्यापन और तेजी से निष्पादन के लिए चंबा, कुल्लू और बिलासपुर सहित कई जिलों में फील्ड विजिट और समीक्षा बैठकें आयोजित की गई हैं। लंबे समय से लंबित उपयोगिता प्रमाणपत्र भी संबंधित एजेंसियों से प्राप्त कर लिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि सरकार की व्यवस्था परिवर्तन की पहल के तहत सभी विकास कार्य समयबद्ध, पारदर्शी और प्रभावी ढंग से पूरे किए जाएंगे, ताकि हर गांव और समाज के हर वर्ग तक विकास का लाभ पहुंचे।