शिमला। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शुक्रवार को विधानसभा में हिमाचल प्रदेश आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 प्रस्तुत किया। यह सर्वेक्षण अर्थ एवं सांख्यिकी विभाग द्वारा तैयार किया गया है और राज्य की वास्तविक आर्थिक स्थिति, प्रगति और उभरती चुनौतियों का संतुलित मूल्यांकन करता है। इसमें राजकोषीय दबाव, जलवायु संवेदनशीलता और बदलती विकास प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए क्षेत्रीय प्रवृत्तियों और नीतिगत प्रयासों का विश्लेषण किया गया है।

प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय वृद्धि

सर्वेक्षण के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में हिमाचल की प्रति व्यक्ति आय (PCI) 2,83,626 रुपये अनुमानित है, जो 2024-25 की तुलना में 9.8 प्रतिशत अधिक है। यह पिछले वर्षों के प्रदर्शन को दर्शाता है, जब 2011-12 में प्रति व्यक्ति आय 87,721 रुपये थी। वहीं, युवा बेरोजगारी (15-29 वर्ष) 16.3 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत 10.2 प्रतिशत से काफी अधिक है।

सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) में 10 प्रतिशत की वृद्धि

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) 2,53,886 करोड़ रुपये अनुमानित है, जो 2024-25 के 2,30,587 करोड़ की तुलना में 10.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। स्थिर भावों पर वास्तविक GSDP 1,56,681 करोड़ रुपये अनुमानित है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8.3 प्रतिशत अधिक है।

प्राथमिक क्षेत्र: 8.4 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान

कृषि, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन, वानिकी और खनन जैसे प्राथमिक क्षेत्र में वित्त वर्ष 2025-26 में 8.4 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद है। फसल क्षेत्र में 11.9 प्रतिशत, वानिकी में 4.4 प्रतिशत, पशुधन में 6.9 प्रतिशत और मत्स्य पालन में 7.0 प्रतिशत की वृद्धि अनुमानित है।

द्वितीयक क्षेत्र में 7.7 प्रतिशत वृद्धि

वित्त वर्ष 2025-26 में विनिर्माण, निर्माण और उपयोगिता सेवाओं से जुड़ा द्वितीयक क्षेत्र 7.7 प्रतिशत बढ़ने की संभावना रखता है। निर्माण क्षेत्र में 12.6 प्रतिशत, बिजली, जल और गैस क्षेत्र में 10.1 प्रतिशत की वृद्धि अनुमानित है।

सेवा क्षेत्र का योगदान

राज्य में सेवा क्षेत्र का GSDVA और रोजगार में सबसे अधिक योगदान है। वित्त वर्ष 2025-26 में व्यापार, होटल और रेस्टोरेंट क्षेत्र 18.9 प्रतिशत, परिवहन और संचार 5.9 प्रतिशत और रियल एस्टेट व पेशेवर सेवाओं में 6.5 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज की गई।

राज्य की आर्थिक चुनौतियां

पिछले चार वर्षों में आपदाओं के कारण राज्य को 46,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। जलवायु परिवर्तन और मौसम में बदलाव से कृषि और बागवानी प्रभावित हुई हैं। सेब उद्योग पर बर्फबारी और ठंड के कम घंटे का असर पड़ा।

कृषि और बागवानी का योगदान

हिमाचल प्रदेश की प्रमुख फल फसल सेब का क्षेत्रफल 1,16,338 हेक्टेयर तक बढ़ चुका है और यह वित्त वर्ष 2024-25 में कुल उत्पादन का 77.58 प्रतिशत है। कृषि और बागवानी क्षेत्र का जीएसवीए वित्त वर्ष 2025-26 में 32,415 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।

उच्च श्रमिक सहभागिता और महिलाओं की भागीदारी

सर्वेक्षण से यह भी पता चला कि हिमाचल प्रदेश में 50.4 प्रतिशत श्रमिक भागीदारी है, जो उत्तराखंड, पंजाब और हरियाणा की तुलना में बेहतर है। महिलाओं की भागीदारी 41.3 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है।