झारखंड के धनबाद जिले में जमीन अधिग्रहण से जुड़े मुआवजा घोटाले पर शुक्रवार को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने सघन कार्रवाई की। एसीबी की टीम ने एक साथ कई ठिकानों पर छापेमारी कर अब तक 16 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है।

मुआवजा वितरण में बड़े पैमाने पर अनियमितता
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि रिंग रोड परियोजना के तहत अधिग्रहीत जमीन के मुआवजा भुगतान में नियमों की अनदेखी की गई। अधिकारियों, कर्मचारियों और बिचौलियों ने मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए और अवैध तरीके से बड़ी रकम निकाल ली। कई मामलों में मुआवजा ऐसे लोगों के नाम पर दिया गया जिनका जमीन से कोई संबंध नहीं था।

दस्तावेजों में हेराफेरी और बिचौलियों की सक्रिय भूमिका
जांच में यह भी सामने आया कि भूमि से जुड़े दस्तावेजों में व्यापक हेराफेरी की गई। बिचौलियों ने अधिकारियों के साथ मिलकर इस घोटाले को अंजाम दिया और सरकारी धन का दुरुपयोग किया।

घोटाले का अनुमानित आकार 300 करोड़ रुपये से अधिक
जानकारों के अनुसार, इस मुआवजा घोटाले में करीब 300 करोड़ रुपये से अधिक की राशि शामिल है। जांच के दौरान कई संदिग्ध लेनदेन अभी तक सामने नहीं आए हैं, जिससे संभावना है कि घोटाले की कुल रकम इससे कहीं अधिक हो सकती है।

2014 से चल रही जांच प्रक्रिया
यह मामला 2014 में पहली बार उजागर हुआ था। इसके बाद राज्य सरकार ने इसे पहले निगरानी ब्यूरो और फिर एसीबी को सौंपा। प्रारंभिक जांच में अनियमितता मिलने पर तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी उदयकांत पाठक और लाल मोहन नायक समेत कई अधिकारियों को निलंबित किया गया था।

जांच अभी जारी, और नाम सामने आने की संभावना
एसीबी ने स्पष्ट किया है कि मामले में और लोगों के नाम सामने आ सकते हैं। जब तक सभी आरोपियों की गिरफ्तारी और पूरी जांच नहीं होती, यह प्रक्रिया जारी रहेगी।