मुंबई। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजित पवार के विमान हादसे में निधन के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। गुरुवार को उनकी पार्टी के कई नेताओं ने मांग उठाई कि उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को राज्य मंत्रिमंडल में स्थान दिया जाए। साथ ही, एनसीपी के दोनों गुटों के बीच संभावित एकीकरण को लेकर भी नए संकेत सामने आए हैं।
एनसीपी के वरिष्ठ नेता और राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन मंत्री नरहरि झिरवाल ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भावना है कि दिवंगत नेता की पत्नी को आगे लाया जाए। उन्होंने कहा कि लोग चाहते हैं कि ‘वहिनी’ सुनेत्रा पवार को सरकार में प्रतिनिधित्व मिले और इसके लिए पार्टी नेतृत्व से बातचीत की जाएगी।
झिरवाल ने यह भी इशारा किया कि पार्टी के अंदर यह महसूस किया जाने लगा है कि अलग-अलग धड़ों में बंटे रहना नुकसानदेह है। उनके मुताबिक, हाल के स्थानीय चुनावों में दोनों एनसीपी गुटों ने साथ काम किया था और इससे यह साफ हुआ है कि एकजुट रहना सभी के हित में है।
इसी कड़ी में अजित पवार के करीबी नेता प्रमोद हिंदुराव ने भी सुनेत्रा पवार से आगे आने की अपील की। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने पति की राजनीतिक विरासत को संभालते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन करना चाहिए। उल्लेखनीय है कि सुनेत्रा पवार ने 2024 का लोकसभा चुनाव एनसीपी के टिकट पर लड़ा था, हालांकि उन्हें बारामती से हार मिली थी।
वहीं, विपक्षी एनसीपी (शरद पवार गुट) की ओर से भी एकीकरण को लेकर नरमी के संकेत दिए गए हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने कहा कि अजित पवार खुद दोनों गुटों को साथ लाने के पक्ष में थे। उनके अनुसार, नगर निकाय और स्थानीय चुनावों के बाद इस मुद्दे पर गंभीर बातचीत करने की योजना बनाई गई थी।
शिंदे ने यह भी कहा कि अजित पवार चाहते थे कि पार्टी और पवार परिवार में मतभेद खत्म हों और सब एकजुट रहें। उन्होंने साफ किया कि यदि सुलह की कोशिशें होती हैं तो उनके गुट को आपत्ति नहीं होगी, हालांकि सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल होने जैसे सवालों पर फैसला बाद में किया जाएगा।