ठाकरे परिवार के लंबे समय से चले आ रहे गढ़ में सेंध लगाते हुए भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के गठबंधन ने शुक्रवार को बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव में स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया। 227 सदस्यीय सदन में सत्तारूढ़ गठबंधन ने कुल 118 सीटों पर जीत दर्ज कर देश की सबसे समृद्ध नगर निगम पर कब्जा जमाया।

चुनाव परिणामों में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और उसे 89 वार्डों में जीत मिली। वहीं मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को 29 सीटें प्राप्त हुईं। इस तरह दोनों दलों ने मिलकर 114 के बहुमत के आंकड़े को पार कर लिया।

विपक्षी दलों का प्रदर्शन

उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और शरद पवार गुट की एनसीपी के गठबंधन को कुल 72 सीटों पर संतोष करना पड़ा। इनमें अकेले शिवसेना (यूबीटी) को 65 वार्डों में सफलता मिली। राज ठाकरे की मनसे ने छह सीटें जीतीं, जबकि एनसीपी (शरद पवार गुट) सिर्फ एक वार्ड तक सिमट गई।

अन्य दलों की बात करें तो कांग्रेस को 24 सीटें मिलीं, एआईएमआईएम ने आठ वार्डों में जीत दर्ज की। अजित पवार गुट की एनसीपी को तीन और समाजवादी पार्टी को दो सीटें मिलीं। इसके अलावा दो निर्दलीय उम्मीदवार भी पार्षद बनने में सफल रहे। उल्लेखनीय है कि बीएमसी चुनाव नौ वर्ष बाद कराए गए।

2017 के नतीजों से बदली तस्वीर

पिछले बीएमसी चुनाव वर्ष 2017 में अविभाजित शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी थी और उसके खाते में 84 सीटें आई थीं। भाजपा को तब 82 सीटें मिली थीं। उस समय दोनों दलों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था। कांग्रेस, एनसीपी, मनसे और अन्य दलों को सीमित सफलता मिली थी।

मतगणना में क्यों हुई देरी

इस बार मतगणना प्रक्रिया तय समय से देरी से शुरू हुई। अधिकारियों के अनुसार, कुछ ईवीएम से जुड़ी तकनीकी खामियों, दोबारा गिनती की मांग और चरणबद्ध मतगणना व्यवस्था के कारण प्रक्रिया सुबह 10 बजे शुरू हो सकी। नगर निगम आयुक्त एवं जिला निर्वाचन अधिकारी भूषण गागरानी ने बताया कि घाटकोपर के एक वार्ड में कंट्रोल यूनिट की जगह प्रिंटिंग ऑक्सीलरी डिस्प्ले यूनिट (पीएडीयू) के इस्तेमाल का मामला सामने आया था, जिससे गिनती प्रभावित हुई।

कई दिग्गज चेहरे चुनाव हार गए

इस चुनाव में कई बड़े राजनीतिक नाम अपने-अपने गढ़ में हार गए। शिवसेना के पूर्व विधायक सदा शंकर सरवणकर के बेटे समाधान और बेटी प्रिया चुनाव नहीं जीत सके। बीईएसटी समिति के पूर्व अध्यक्ष अनिल कोकिल भी पराजित हुए। भाजपा के रवि राजा, विनोद मिश्रा, प्रीति पाटकर और राजुल देसाई को भी हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस की पूर्व पार्षद शीतल म्हात्रे, शिवसेना की दीप्ति वायकर और एनसीपी के कैप्टन मलिक भी चुनाव नहीं जीत पाए।

कुछ पुराने चेहरे फिर चमके

पूर्व महापौर किशोरी पेडणेकर, विश्वका राऊत, श्रद्धा जाधव और मिलिंद वैद्य ने अपने-अपने वार्ड से जीत दर्ज की। पूर्व उपमहापौर हेमांगी वोरलिकार और सुहास वडकर भी पार्षद बनने में सफल रहे।

दक्षिण मुंबई के कोलाबा क्षेत्र से भाजपा के मकरंद नार्वेकर ने जीत दर्ज की। उनकी संपत्ति करीब 124 करोड़ रुपये बताई गई है। वे विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के भाई हैं। राहुल नार्वेकर की भाभी हर्षिता और चचेरी बहन गौरवी शिवलकर-नार्वेकर ने भी अलग-अलग वार्डों से जीत हासिल की।

सबसे कम मतदान वाला वार्ड

कोलाबा का वार्ड नंबर 227 मतदान के मामले में सबसे पीछे रहा, जहां महज 20.88 प्रतिशत वोट पड़े। वहीं पूरे मुंबई में औसत मतदान प्रतिशत 52.94 रहा।

नए चेहरों को भी मिला मौका

भाजपा प्रवक्ता नवनाथ बन, शिवसेना (यूबीटी) विधायक सुनील शिंदे के भाई निशिकांत शिंदे, पूर्व विधायक सुनील प्रभु के बेटे अंकित प्रभु और किरण तावडे जैसे नए नामों ने भी चुनाव जीतकर नगर निगम में प्रवेश किया। शिवसेना (यूबीटी) के रमाकांत रहाटे और शैलेन्द्र फणसे तथा भाजपा की राखी जाधव ने लगातार चौथी बार जीत दर्ज की। कई अन्य पार्षदों ने भी दूसरी बार जनता का भरोसा हासिल किया।