नई दिल्ली: भारत की वायु सुरक्षा को और सुदृढ़ करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। 114 अतिरिक्त राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद से जुड़े प्रस्ताव को रक्षा खरीद बोर्ड से सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। इसे इस बहुचर्चित रक्षा सौदे की प्रक्रिया में पहली बड़ी आधिकारिक प्रगति माना जा रहा है।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में रक्षा खरीद बोर्ड ने इस प्रस्ताव को स्वीकृति दी। अब यह मामला रक्षा अधिग्रहण परिषद के समक्ष रखा जाएगा, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे। इसके बाद कीमत और शर्तों पर विस्तृत बातचीत होगी तथा अंतिम चरण में इस सौदे को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की मंजूरी लेनी होगी।

भारत–फ्रांस वार्ता के दौरान समझौते को अंतिम रूप देने की तैयारी

सूत्रों का कहना है कि फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच प्रस्तावित मुलाकात के दौरान इस रक्षा समझौते को अंतिम रूप देने का प्रयास किया जा सकता है। यदि ऐसा होता है, तो यह भारत और फ्रांस के रक्षा संबंधों को नई ऊंचाई देगा। 114 नए राफेल विमानों के शामिल होने से भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता, तकनीकी बढ़त और रणनीतिक ताकत में बड़ा इजाफा होगा, जो मौजूदा सुरक्षा परिदृश्य में बेहद अहम माना जा रहा है।

अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सौदा

राफेल लड़ाकू विमानों से जुड़ा यह सौदा करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये (लगभग 36 अरब डॉलर) का आंका जा रहा है, जिसे भारत का अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सौदा माना जा रहा है। योजना के तहत 12 से 18 विमान फ्रांस से सीधे तैयार अवस्था में मंगाए जाएंगे, जबकि शेष विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा।

‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगा मजबूत आधार

इस परियोजना में स्वदेशीकरण पर विशेष ध्यान दिया गया है। शुरुआती चरण में विमानों में लगभग 30 प्रतिशत घरेलू उपकरण और सामग्री शामिल की जाएगी, जिसे आगे बढ़ाकर 60 प्रतिशत तक ले जाने की योजना है। चरणबद्ध तरीके से स्वदेशी हिस्सेदारी बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि भारतीय रक्षा उद्योग को दीर्घकालिक लाभ मिल सके।

भारत की मंशा है कि इन विमानों में देश में विकसित हथियार और प्रणालियां लगाई जाएं, हालांकि सॉफ्टवेयर के सोर्स कोड फ्रांस के पास ही रहेंगे। यदि यह सौदा पूरा होता है, तो भारतीय वायुसेना के पास कुल राफेल विमानों की संख्या 176 हो जाएगी। वर्तमान में वायुसेना के पास 36 राफेल मौजूद हैं, जबकि नौसेना के लिए 26 राफेल पहले ही ऑर्डर किए जा चुके हैं।

ऑपरेशन सिंदूर में राफेल का प्रभावशाली प्रदर्शन

राफेल को प्राथमिकता दिए जाने के पीछे इसका ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार प्रदर्शन भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है। इस अभियान में राफेल ने दुश्मन की मिसाइल क्षमताओं को निष्क्रिय करने में अहम भूमिका निभाई थी। इसके साथ ही फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट भारत में राफेल के एम-88 इंजन की मरम्मत और रखरखाव सुविधा विकसित करेगी। टाटा सहित कई भारतीय कंपनियां विमान निर्माण और मेंटेनेंस से जुड़ी प्रक्रिया में भागीदार होंगी।