महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित एक जनसभा में एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने देश की स्वतंत्रता संग्राम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की भूमिका पर सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि आरएसएस के संस्थापक केबी हेडगेवार को ब्रिटिश सरकार के खिलाफ नहीं बल्कि खिलाफत आंदोलन का समर्थन करने के कारण जेल हुई थी।
ओवैसी ने भाजपा पर देश में हिंदुत्ववादी एजेंडा बढ़ाने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार अपनी नाकामियों से ध्यान भटकाने के लिए मुसलमानों और बांग्लादेशियों के मुद्दे को हवा दे रही है। उन्होंने दावा किया, "इस क्षेत्र में कोई बांग्लादेशी नहीं है, और अगर कोई मिलता है तो यह मोदी सरकार की विफलता है।"
खिलाफत आंदोलन का संदर्भ
ओवैसी ने बताया कि खिलाफत आंदोलन (1919-1924) मुस्लिम समुदाय का एक आंदोलन था, जो प्रथम विश्व युद्ध के बाद तुर्की के खलीफा पद की बहाली और ओटोमन साम्राज्य के विघटन के विरोध में चला। इसका नेतृत्व मोहम्मद अली और शौकत अली ने किया था और महात्मा गांधी तथा कांग्रेस ने भी इसे समर्थन दिया।
ओवैसी ने आरएसएस पर कटाक्ष करते हुए कहा, "संघ हमें देशभक्ति सिखाता है, लेकिन क्या उनमें से किसी ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में अपने प्राण त्यागे? वहीं, मुंबई के यूसुफ मेहरअली ने 'भारत छोड़ो' और 'साइमन गो बैक' जैसे नारे दिए।"
सरकार और सुरक्षा एजेंसियों पर भी निशाना
ओवैसी ने केंद्र सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पुलिस, खुफिया और सीमा सुरक्षा बल होने के बावजूद भारत-बांग्लादेश सीमा पर 10 किलोमीटर की बाड़ भी पूरी नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन और पाकिस्तान का आईएसआई बांग्लादेश में सक्रिय है, जबकि भाजपा और आरएसएस इसे लेकर केवल नारेबाजी कर रहे हैं।
साथ ही उन्होंने नागरिकता कानून और एसआईआर प्रक्रिया पर भी सरकार पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि नागरिकता पर सवाल उठाने का अधिकार गृह मंत्रालय का है, लेकिन मोदी सरकार ने यह जिम्मेदारी चुनाव आयोग को सौंप दी। ओवैसी ने लोगों से आगामी नगर निगम चुनावों में बड़ी संख्या में वोट डालने की अपील की।