ठाणे की एक विशेष पॉक्सो कोर्ट ने 10 साल की बच्ची के यौन उत्पीड़न के मामले में 35 वर्षीय आरोपी को 20 साल की कठोर जेल सजा सुनाई है। जज रूबी यू मालवणकर ने 3 जनवरी को दिए फैसले में कहा कि आरोपी ने बच्चों का भरोसा तोड़कर गंभीर अपराध किया है और इसे देखते हुए समाज में ऐसे अपराधियों को कड़ा संदेश देना आवश्यक था।

आरोपी और आरोप
आरोपी विजयभान ठाणे के वर्तकनगर इलाके की नेहरू नगर झुग्गी बस्ती का निवासी है। उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(n) (बार-बार यौन शोषण), 506 (आपराधिक धमकी) और पॉक्सो एक्ट की धारा 5 व 6 के तहत दोषी ठहराया गया।

स्थानीय बच्चों के बीच आरोपी को 'समोसेवाला अंकल' के नाम से जाना जाता था क्योंकि वह उन्हें समोसे खिलाता था। जज ने कहा कि इस विश्वास का फायदा उठाकर उसने पीड़िता को अपने घर बुलाकर 4 जनवरी से 22 जनवरी 2024 के बीच बार-बार यौन शोषण किया।

मामले का खुलासा
मामला तब सामने आया जब 23 जनवरी 2024 को पीड़िता के स्कूल शिक्षक ने देखा कि बच्ची को चोट और ब्लीडिंग हो रही है। शिक्षक ने तुरंत इसकी जानकारी उसकी मां को दी, जिससे आरोपी का खेल खुल गया।

कोर्ट का तर्क
जज ने कहा कि आरोपी ने बच्चों और उनके परिवारों का भरोसा तोड़ा। ऐसे अपराध में आमतौर पर दोषी यह सुनिश्चित करता है कि कोई उसकी हरकतों को नोटिस न करे। इसलिए सिर्फ यह तथ्य कि जांच में कोई गवाह नहीं मिला, पीड़िता की गवाही को खारिज करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

सजा और जुर्माना
कोर्ट ने आरोपी को पॉक्सो एक्ट के तहत 20 साल की कड़ी कैद और 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया। इसके अलावा, IPC की धारा 506 के तहत आपराधिक धमकी देने के लिए 3 साल की कड़ी कैद और 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी।

जज ने फैसला सुनाते हुए कहा कि यह सजा समाज में यह संदेश देगी कि बच्चों का भरोसा तोड़ने और यौन शोषण करने वाले अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा।