जयपुर: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर द्वारा नगर निगम और शहरी निकाय क्षेत्रों में राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के किनारे स्थित 1,102 शराब दुकानों को हटाने/स्थानांतरित करने के निर्देश पर रोक लगा दी।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता शामिल हैं, ने यह अंतरिम रोक राजस्थान राज्य और अन्य शराब लाइसेंसधारकों द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए लगाई। याचिकाओं में हाईकोर्ट के 24 नवंबर 2025 के आदेश को चुनौती दी गई थी।
हाईकोर्ट के आदेश का सार
राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह राजमार्गों से 500 मीटर की परिधि में आने वाली सभी शराब दुकानों की पहचान कर उन्हें हटाए और स्थानांतरित करे, चाहे वे नगर निगम, स्थानीय स्वशासी निकाय या वैधानिक विकास प्राधिकरणों के अंतर्गत क्यों न हों। हाईकोर्ट ने कहा था कि नगर सीमाओं का विस्तार सुरक्षा मानकों को कमजोर नहीं कर सकता और राजमार्गों के पास शराब की उपलब्धता से सड़क दुर्घटनाओं में वृद्धि की चिंता जताई।
सुप्रीम कोर्ट में दलीलें
राजस्थान की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने तर्क दिया कि हाईकोर्ट का 500 मीटर का कठोर आदेश सुप्रीम कोर्ट के पिछले निर्देशों के विपरीत है। राज्य ने कहा कि 2017 और 2018 के सुप्रीम कोर्ट के आदेशों में यह दूरी घटाकर 220 मीटर की गई थी और नगर निगम क्षेत्रों में शराब दुकानों पर राज्य की विवेकाधिकार आधारित छूट दी गई थी।
राज्य ने यह भी बताया कि अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्थापित कानून (अनुच्छेद 141) को बदल या रद्द नहीं कर सकता।
सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगाई। इससे राज्य सरकार और प्रभावित लाइसेंसधारकों को अस्थायी राहत मिली है। मामले की अगली सुनवाई, सभी पक्षों के अभिवचनों के बाद तय होगी।