लखनऊ। उत्तर प्रदेश में थोक दवा कारोबार के लिए लाइसेंस प्राप्त करने की प्रक्रिया अब पहले से कहीं अधिक सख्त कर दी गई है। नई व्यवस्था के तहत लाइसेंस आवेदन के समय दवा की दुकान और गोदाम दोनों की जियो-टैगिंग अनिवार्य होगी। आवेदक की मौजूदगी में प्रस्तावित स्थल का जीपीएस लोकेशन दर्ज किया जाएगा, जिससे परिसर की वास्तविक स्थिति की पुष्टि हो सके।

इसके अलावा अब औषधि निरीक्षकों द्वारा जारी किए गए लाइसेंसों में से हर महीने कम से कम 10 प्रतिशत मामलों की रैंडम जांच सहायक आयुक्त स्तर पर की जाएगी। इस दौरान लाइसेंस से जुड़ी सभी जानकारियों और दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन होगा।

अनुभव और वेतन प्रमाण अनिवार्य

लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति को अब केवल अनुभव प्रमाणपत्र ही नहीं, बल्कि संबंधित फर्म में कार्य करने के दौरान मिले वेतन का प्रमाण भी देना होगा। इसके लिए पे-स्लिप या अन्य वैध दस्तावेज जमा करना जरूरी किया गया है।

कोडीन कफ सिरप से जुड़े हालिया मामलों के बाद यह सामने आया था कि कई जगह नियमों को नजरअंदाज कर लाइसेंस जारी किए गए। इन्हीं शिकायतों के मद्देनजर औषधि आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने लाइसेंस प्रक्रिया में सख्ती लाने और नियमों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। फिलहाल इन मामलों की जांच चल रही है, जिसमें कई औषधि निरीक्षक और सहायक आयुक्त जांच के दायरे में आ सकते हैं।

शपथ पत्र और फर्म की पृष्ठभूमि की जांच

अब आवेदन पत्र के साथ आवेदक को पिछले तीन वर्षों में किए गए व्यवसाय या पेशे से संबंधित शपथ पत्र देना होगा। फार्मासिस्ट का पूरा विवरण, अनुभव प्रमाणपत्र और संबंधित फर्म की वैधता की गहन जांच की जाएगी। जिन फर्मों का लाइसेंस पहले रद्द हो चुका है या जिनके खिलाफ एफआईआर दर्ज है, उनके द्वारा जारी अनुभव प्रमाणपत्र मान्य नहीं होंगे।

अनुभव देने वाली फर्म को वेतन भुगतान का रिकॉर्ड, उपस्थिति या वेतन रजिस्टर, वैध लाइसेंस और शपथ पत्र भी प्रस्तुत करना होगा। प्राइवेट लिमिटेड या लिमिटेड कंपनियों के मामलों में प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों की सूची और दैनिक संचालन के लिए जिम्मेदार व्यक्ति का अलग शपथ पत्र अनिवार्य होगा।

परिसर और सुविधाओं की होगी सख्त जांच

यदि दुकान या गोदाम आवेदक की स्वयं की संपत्ति नहीं है, तो साधारण किरायानामे के बजाय रजिस्टर्ड किरायानामा देना होगा। दुकान और गोदाम दोनों की जियो-टैगिंग की जाएगी। निरीक्षण के दौरान दवाओं के भंडारण, रेफ्रिजरेटर, कोल्ड स्टोरेज, बिजली आपूर्ति और अन्य आवश्यक सुविधाओं की भी जांच की जाएगी। साथ ही आसपास स्थित दुकानों और क्षेत्र का पूरा विवरण भी देना होगा।

हर महीने 10% लाइसेंस की रैंडम जांच

पोर्टल के माध्यम से प्राप्त आवेदनों की जांच के दौरान औषधि निरीक्षक को सभी कमियां एक ही बार में स्पष्ट करनी होंगी। फर्म से जुड़े सभी व्यक्तियों का विवरण खंगाला जाएगा और यह भी देखा जाएगा कि उनमें से कोई व्यक्ति पहले नारकोटिक्स एक्ट के तहत लाइसेंस निरस्त होने से जुड़ा न रहा हो।

निरीक्षण के समय यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रस्तावित प्रतिष्ठान किसी पूर्णतः आवासीय क्षेत्र में न हो। यदि भौतिक सत्यापन में कोई कमी पाई जाती है, तो या तो लाइसेंस निरस्त किया जाएगा या कमियां दूर कराए जाने के बाद ही लाइसेंस जारी किया जाएगा।