सुप्रीम कोर्ट ने शास्त्रीनगर नगर के सेंट्रल मार्केट प्रकरण में सोमवार को 44 आवासीय भूखंडों में हो रही सभी व्यावसायिक गतिविधियों को रोकने का आदेश जारी किया है। इन भूखंडों में चल रहे स्कूल, नर्सिंग होम और बैंक्वेट हॉल भी शामिल हैं। कोर्ट ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि अस्पतालों के मरीजों को अन्य अस्पतालों में शिफ्ट कराना सुनिश्चित किया जाए। ऐसे स्कूल और अस्पताल सील करने के आदेश भी अदालत ने दिए हैं। अगली सुनवाई नौ अप्रैल को होगी।

सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और केवी विश्वनाथन की पीठ ने सुनवाई की। आवास एवं विकास परिषद की ओर से बताया गया कि सेंट्रल मार्केट के 860 भूखंडों में से 44 पूरी तरह व्यावसायिक गतिविधियों में लगे हैं। इनमें छह स्कूल, छह अस्पताल और चार बैंक्वेट हॉल के अलावा विभिन्न शोरूम और दुकानें भी शामिल हैं। अदालत ने कहा कि ऐसे स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा खतरे में है और किसी भी हादसे की स्थिति गंभीर हो सकती है।

अदालत ने आवासीय भवनों में दिए गए बिजली कनेक्शनों की जानकारी भी मांगी। परिषद के वकील ने बताया कि इन भवनों में व्यावसायिक कनेक्शन ही दिए गए हैं। अदालत ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (पीवीवीएनएल) से जवाब मांगा।

याचिकाकर्ता लोकेश खुराना के वकील तुषार जैन ने कहा कि इस तरह की स्थिति परिषद की अन्य योजनाओं में भी देखने को मिलती है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिए कि स्कूलों के छात्रों को अन्य स्थानों पर दाखिला दिलाया जाए और अस्पतालों के मरीजों को अगली सुनवाई तक अन्य अस्पतालों में शिफ्ट किया जाए। शास्त्रीनगर योजना संख्या सात के 44 भवनों में छह स्कूल, छह अस्पताल और चार बैंक्वेट हॉल शामिल हैं। स्थानीय पुलिस प्रशासन को इन आदेशों को लागू करने की जिम्मेदारी दी गई है।

अदालत में मुख्य सचिव आवास एवं शहरी नियोजन पी. गुरुप्रसाद और पूर्व कमिश्नर हृषिकेश भास्कर यशोद भी मौजूद रहे। मामले से जुड़ा एक पहलू यह है कि पूर्व कमिश्नर ने 27 अक्टूबर 2025 को सेंट्रल मार्केट को ‘बाजार स्ट्रीट’ घोषित करने के लिए मास्टरप्लान में संशोधन का आदेश दिया था। याचिकाकर्ता ने इसे सुप्रीम कोर्ट के अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने के आदेश के खिलाफ बताया। कोर्ट ने पूर्व कमिश्नर से इस आदेश के पीछे की परिस्थितियों की विस्तृत रिपोर्ट और माफीनामा पेश करने को कहा।

अदालत के आदेश के बाद आवास एवं विकास परिषद की टीम मार्केट पहुंची और व्यापारियों को अवैध निर्माण खाली करने का निर्देश दिया। लेकिन बड़ी संख्या में व्यापारियों ने विरोध किया और टीम का घेराव किया। उन्होंने कहा कि अभी आदेश ऑनलाइन अपलोड नहीं हुआ है, इसलिए इसका अनुपालन कैसे कराया जा रहा है। कुछ समय बाद टीम को लौटना पड़ा।