मुजफ्फरनगर। ई-रजिस्ट्री व्यवस्था को लेकर जिले में विरोध लगातार मुखर होता जा रहा है। सोमवार को आंदोलन के 15वें दिन अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों, कंप्यूटर टाइपिस्टों और स्टांप विक्रेताओं ने सदर तहसील से कलेक्ट्रेट तक मौन पैदल मार्च निकालकर अपनी नाराजगी जाहिर की।

शाम करीब पांच बजे शुरू हुए इस मार्च में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। हाथों में मांगों से जुड़ी तख्तियां लिए प्रदर्शनकारी शांतिपूर्वक कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रशासन के माध्यम से सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए ज्ञापन सौंपा।


रोजगार पर संकट का आरोप

आंदोलनकारियों का कहना है कि ई-रजिस्ट्री प्रणाली लागू होने के बाद उनसे जुड़े हजारों लोगों की आजीविका प्रभावित होगी। उनका दावा है कि अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों, कंप्यूटर ऑपरेटरों और स्टांप विक्रेताओं की बड़ी संख्या इस व्यवस्था से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है और नई प्रणाली से उनके रोजगार पर खतरा मंडरा रहा है।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे पिछले 15 दिनों से कलमबंद हड़ताल पर हैं, लेकिन अब तक उनकी मांगों पर कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई है। उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो अनेक परिवारों के सामने आर्थिक कठिनाइयां खड़ी हो सकती हैं।

सरकार पर उपेक्षा का आरोप

मौन मार्च में शामिल समाजवादी पार्टी के नेता राकेश शर्मा ने कहा कि प्रदेश की कई तहसीलों में अधिवक्ता और दस्तावेज लेखक ई-रजिस्ट्री के विरोध में आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी चिंताओं पर ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने प्रदेश में कानून-व्यवस्था और बिजली आपूर्ति से जुड़े मुद्दों का भी जिक्र करते हुए सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए।


270 तहसीलों में विरोध का दावा

संघर्ष समिति के सदस्य मनोज पाल ने बताया कि उत्तर प्रदेश की करीब 270 तहसीलों में इस व्यवस्था के खिलाफ विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक अधिवक्ता के कार्य से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कई परिवारों की आजीविका जुड़ी होती है। यदि रजिस्ट्री की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी जाती है तो इससे बड़ी संख्या में लोगों के रोजगार पर असर पड़ सकता है।

पुनर्विचार की मांग

आंदोलनकारियों ने सरकार से ई-रजिस्ट्री व्यवस्था की समीक्षा करने और इससे प्रभावित वर्गों के हितों को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लेने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर विचार नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।