मुजफ्फरनगर/लखनऊ। उत्तर प्रदेश में धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर बढ़ती भिक्षावृत्ति, नशाखोरी और गंदगी को लेकर पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान ने सरकार से सख्त कदम उठाने की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र भेजकर धार्मिक स्थलों को “नो-डिस्टर्बेंस/क्लीन ज़ोन” घोषित करने का सुझाव दिया है।
अपने पत्र में अशोक बालियान ने कहा कि भारत में भिक्षावृत्ति को नियंत्रित करने के लिए कोई समग्र केंद्रीय कानून नहीं है। वर्तमान में लागू नियम 1950–60 के दशक के Bombay Prevention of Begging Act, 1959 और राज्यों के स्थानीय कानूनों पर आधारित हैं, जिनमें सार्वजनिक स्थानों पर भीख मांगना निषिद्ध माना गया है। इसके बावजूद धार्मिक स्थलों के आसपास भिखारियों और नशे के आदी लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
उन्होंने विशेष रूप से मुज़फ्फरनगर के शिव चौक सहित प्रमुख धार्मिक स्थलों का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां भिखारियों और नशेड़ियों की मौजूदगी से श्रद्धालुओं को असुविधा हो रही है और स्थल की स्वच्छता व सुरक्षा प्रभावित हो रही है। बालियान के अनुसार, देश में भिखारियों और नशा पीड़ितों के लिए प्रभावी पुनर्वास व्यवस्था का अभाव एक गंभीर सामाजिक समस्या है।
पत्र में यह भी कहा गया कि धार्मिक स्थलों पर दान व्यवस्था का पुनर्गठन इस समस्या के समाधान की दिशा में अहम कदम हो सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि मंदिर परिसरों में भिखारियों को सीधे दान देने के बजाय प्रशासन द्वारा अधिकृत दान पेटियों या केंद्रों के माध्यम से दान लिया जाए। इस धन का उपयोग भोजन, आश्रय और पुनर्वास कार्यक्रमों में किया जाना चाहिए।
अशोक बालियान ने यह भी रेखांकित किया कि उत्तर प्रदेश में भिक्षावृत्ति प्रतिषेध अधिनियम, 1975, नगरपालिका अधिनियम, 1916, नगर निगम अधिनियम, 1959 और मादक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 जैसे कानून पहले से लागू हैं, जिनके तहत गंदगी, अतिक्रमण और नशे से जुड़ी गतिविधियां दंडनीय हैं। इसके बावजूद समस्या का बने रहना प्रशासनिक समन्वय और इच्छाशक्ति की कमी को दर्शाता है।
उन्होंने धार्मिक स्थलों के 100 मीटर के दायरे को “नो-डिस्टर्बेंस/क्लीन ज़ोन” घोषित करने, इस क्षेत्र में भीख मांगने और नशे पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने तथा पुलिस, नगर निकाय, समाज कल्याण और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम गठित करने की मांग की है।
पत्र में नागपुर नगर निगम द्वारा चलाए गए ऑपरेशन मुक्ति और भोपाल-इंदौर जैसे शहरों के उदाहरण देते हुए कहा गया कि सख्त और समन्वित कार्रवाई से सार्वजनिक व्यवस्था में सुधार संभव है।
अशोक बालियान ने उम्मीद जताई है कि राज्य सरकार इस विषय को गंभीरता से लेते हुए धार्मिक स्थलों की पवित्रता, सुरक्षा और स्वच्छता बनाए रखने के लिए स्पष्ट नीति और निर्देश जारी करेगी।