अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावे की रकम में कथित अनियमितताओं के मामले ने अब कानूनी रूप ले लिया है। विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट शासन को सौंपे जाने के दो दिन बाद पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मुकदमे में मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कुछ प्रभावशाली लोगों के करीबी व्यक्तियों के नाम सामने आने से प्रकरण और अधिक चर्चा में आ गया है।

पुलिस ने आठ नामजद आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और चढ़ावे की राशि में कथित गड़बड़ी से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। साथ ही कुछ अज्ञात व्यक्तियों को भी जांच के दायरे में रखा गया है।

एसआईटी रिपोर्ट के बाद दर्ज हुआ मुकदमा

बताया जा रहा है कि 6 जून को मंदिर में प्राप्त चढ़ावे के लेखा-जोखा में कथित अनियमितताओं की जानकारी सामने आई थी। शुरुआती स्तर पर ट्रस्ट की ओर से कुछ संदिग्ध लोगों से पूछताछ भी की गई थी। मामले के बढ़ने पर 13 जून को एसआईटी का गठन किया गया। जांच पूरी होने के बाद समिति ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपते हुए एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की थी।

गुरुवार को ट्रस्टी कृष्ण मोहन की शिकायत के आधार पर कोतवाली रामजन्मभूमि में मुकदमा दर्ज किया गया। नामजद आरोपियों में अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, मनीष यादव, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्र और सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं।

एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से चढ़ावे की राशि के प्रबंधन में अनियमितताएं करते हुए आर्थिक लाभ प्राप्त करने का प्रयास किया। पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है और संबंधित लोगों से पूछताछ की जा रही है।

जमीन खरीद मामलों के दस्तावेज भी जांच के दायरे में

इसी बीच आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने एसआईटी को जमीन खरीद-फरोख्त से जुड़े 11 दस्तावेज सौंपे हैं। उनका दावा है कि मंदिर से जुड़े कुछ भूमि सौदों में भारी वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं और करोड़ों रुपये के अंतर वाले लेनदेन की जांच आवश्यक है।

संजय सिंह ने एसआईटी अधिकारियों से मुलाकात कर आरोप लगाया कि मंदिर के लिए खरीदी गई कुछ जमीनें बाजार मूल्य से कई गुना अधिक कीमत पर ली गईं, जिससे दानदाताओं के धन का नुकसान हुआ। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच की मांग की है।

एक ही दिन में बढ़ी जमीन की कीमत का दावा

सांसद द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के अनुसार, मार्च 2021 में एक भूमि का सौदा पहले दो करोड़ रुपये में हुआ और कुछ ही समय बाद वही जमीन कथित रूप से 18.5 करोड़ रुपये में ट्रस्ट को बेची गई। इसे लेकर कीमतों में भारी अंतर का दावा किया गया है।

हालांकि इन आरोपों की सत्यता और पूरे लेनदेन की परिस्थितियों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। एसआईटी अब उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों का परीक्षण कर रही है और मामले के विभिन्न पहलुओं की जांच आगे बढ़ा रही है।