मुजफ्फरनगर: तितावी थाने में गुरुवार को एक बेहद भावुक और मानवीय दृश्य देखने को मिला, जहां वर्दी केवल कानून व्यवस्था का प्रतीक नहीं बल्कि संवेदना और अपनापन भी नजर आई। दोना-पत्तल फैक्ट्री से मुक्त कराए गए बंधुआ मजदूरों और वर्षों बाद उनसे मिलने पहुंचे उनके परिजनों के लिए पुलिस ने विशेष व्यवस्था की, जिसे देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं।
थाना परिसर में कहीं कचौड़ी और अन्य व्यंजन तैयार किए जा रहे थे तो कहीं महिला पुलिसकर्मी रसोई संभालती नजर आईं। वहीं क्षेत्राधिकारी, थाना प्रभारी और अन्य पुलिसकर्मी स्वयं आगे बढ़कर मजदूरों और उनके परिजनों को भोजन परोसते दिखे। पूरा माहौल किसी सरकारी थाने का नहीं बल्कि एक पारिवारिक मिलन समारोह जैसा प्रतीत हो रहा था।

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले तितावी क्षेत्र के मांडी गांव में स्थित एक दोना-पत्तल फैक्ट्री पर पुलिस, प्रशासन और श्रम विभाग की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर 12 बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराया था। इन मजदूरों को लंबे समय तक बंधक बनाकर काम कराया जा रहा था और उनके साथ मारपीट व अन्य अमानवीय व्यवहार किए जाने के आरोप सामने आए थे।
मुक्ति की सूचना मिलते ही नेपाल, बिहार, उत्तराखंड, राजस्थान समेत कई राज्यों से मजदूरों के परिजन मुजफ्फरनगर पहुंचे। वर्षों बाद अपने परिजनों से मिलते ही कई लोग भावुक होकर रो पड़े। इस दौरान पुलिस ने न केवल कानूनी प्रक्रिया पूरी की बल्कि मानवीय संवेदनाओं के साथ परिवारों का सहारा भी बना।
प्रताड़ना झेल चुके मजदूरों के लिए पुलिस द्वारा परोसा गया भोजन केवल खाना नहीं बल्कि सम्मान और नई शुरुआत का प्रतीक बन गया। कई मजदूरों ने पुलिसकर्मियों का हाथ पकड़कर आभार जताया, जबकि परिजनों ने प्रशासन और सरकार के समर्थन में आभार व्यक्त किया।
सरकारी सहायता के तहत सभी मुक्त मजदूरों को तत्काल 30-30 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी जा रही है। इसके साथ ही जांच पूरी होने के बाद नाबालिग पीड़ितों को दो-दो लाख रुपये तथा अन्य मजदूरों को एक-एक लाख रुपये मुआवजा दिए जाने की प्रक्रिया भी प्रस्तावित है।

बंधुआ मजदूरी के मामलों में कार्रवाई सामान्य बात है, लेकिन तितावी थाने की यह संवेदनशील पहल लोगों के बीच विशेष चर्चा का विषय बन गई है। इस घटना ने यह संदेश दिया है कि पुलिस की भूमिका केवल कानून लागू करने तक सीमित नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर वह पीड़ितों के जीवन में भरोसे और सहारे की भूमिका भी निभाती है।