उत्तराखंड। टिहरी जिले में शुक्रवार को उस समय भावुक माहौल बन गया जब अग्निवीर रोहित रावत का पार्थिव शरीर उनके पैतृक घाट बिनपुला में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार के लिए लाया गया। देश सेवा के सपने के साथ सेना में शामिल हुए इस युवा जवान के अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण उमड़ पड़े।

जैसे ही रोहित की शहादत की खबर गांव पहुंची, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। अंतिम यात्रा के दौरान “रोहित रावत अमर रहे” के नारों से वातावरण गूंज उठा और हर आंख नम नजर आई।

ड्यूटी के दौरान हुआ हादसा

टिहरी के घनसाली क्षेत्र के मेंदू सिंधवाल गांव निवासी रोहित रावत करीब एक वर्ष पहले अग्निवीर योजना के तहत भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। जनवरी 2026 में उन्होंने अपनी ट्रेनिंग पूरी की थी और इसके बाद उन्हें 20 गढ़वाल राइफल्स में जम्मू में तैनाती मिली थी।

जानकारी के अनुसार, 10 जून की सुबह ड्यूटी के दौरान उनकी सर्विस राइफल से अचानक गोली चल गई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। सेना ने घटना की जांच शुरू कर दी है।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

रोहित अपने परिवार में सबसे बड़े बेटे थे। उनके पिता सुरेंद्र सिंह दुबई में एक होटल में कार्यरत हैं, जबकि छोटा भाई मोहित नौवीं कक्षा में पढ़ाई कर रहा है। बेटे की शहादत की खबर से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई

गुरुवार देर शाम सेना के विशेष वाहन से तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर गांव लाया गया। शुक्रवार सुबह बिनपुला घाट पर सैन्य टुकड़ी ने अंतिम सलामी दी और पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।

इस मौके पर घनसाली विधायक शक्ति लाल शाह भी मौजूद रहे। उन्होंने शहीद के परिवार को ढांढस बंधाते हुए घोषणा की कि रोहित रावत की स्मृति में उनके गांव में विधायक निधि से एक ‘स्मृति द्वार’ का निर्माण कराया जाएगा।