पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और वैश्विक स्तर पर बढ़ते ऊर्जा संकट के बीच भारत के आम उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) में 10 रुपये प्रति लीटर तक की कटौती की है, ताकि महंगे कच्चे तेल का भार आम आदमी पर न पड़े और तेल कंपनियां पंप पर कीमतें बढ़ा न सकें। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

लॉकडाउन की अफवाहों को किया खारिज
राज्यसभा में वित्त विधेयक 2026 पर चर्चा के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि युद्ध के कारण देश में लॉकडाउन की आशंकाएं केवल अफवाहें हैं और लोगों में डर फैलाने के लिए फैलाई जा रही हैं। उन्होंने राजनेताओं से अपील की कि वे ऐसी अफवाहें न फैलाएं।

निर्मला सीतारमण ने कहा, “महंगे वैश्विक कच्चे तेल का बोझ आम आदमी पर न पड़े, इसके लिए सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर 10-10 रुपये की कटौती की है। जबकि कई देशों में मोटर ईंधन की कीमतों में 20 से 50 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है, भारत में कीमतें स्थिर रखी गई हैं।”

पड़ोसी देशों में बढ़ा संकट, भारत सुरक्षित
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत की स्थिति पड़ोसी देशों की तुलना में बेहतर है। पाकिस्तान में हालात काफी गंभीर हैं। वहां पेट्रोल और डीजल की कीमतें रातों-रात 20% बढ़ीं और हाई-ऑक्टेन ईंधन के दाम 200% तक पहुंच गए। सिंध प्रांत में ‘स्मार्ट लॉकडाउन’ लागू किया गया है, स्कूल बंद हैं, सरकारी दफ्तरों में चार दिन का वर्किंग वीक और निजी दफ्तरों में 50% स्टाफ वर्क-फ्रॉम-होम पर हैं।

बांग्लादेश में भी ऊर्जा संकट गहरा गया है। ढाका में घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पांच-पांच घंटे की रोटेशनल बिजली कटौती हो रही है। पेट्रोल पंप बंद हैं और ईंधन आपूर्ति में 10-15 प्रतिशत की कमी हुई है।

निर्मला सीतारमण ने बताया कि इन दोनों देशों ने भारत की तरह करों में कोई राहत नहीं दी है।

सरकार राजकोषीय मोर्चे पर सतर्क
वित्त मंत्री ने आश्वस्त किया कि भारत सरकार राजकोषीय घाटे पर पूरी नजर रखेगी और गैर-कर राजस्व जुटाने के प्रयास तेज करेगी। राज्यसभा ने वित्त विधेयक को ध्वनि मत से लोकसभा को भेज दिया, जिसके साथ ही 1 अप्रैल से शुरू होने वाले नए वित्त वर्ष के बजट की प्रक्रिया पूरी हो गई है।