भारतीय रुपया शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में रुपया 28 पैसे कमजोर होकर 94.24 पर बंद हुआ। यह रुपये में लगातार तीसरे दिन की गिरावट है, पहले मंगलवार और बुधवार को भी रुपया तेजी से कमजोर हुआ था।

विश्लेषकों का कहना है कि रुपये की कमजोरी के पीछे मुख्य कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार निकासी और मध्य पूर्व, विशेषकर ईरान में जारी भू-राजनीतिक तनाव हैं। इन कारकों ने बाजार की धारणा को नकारात्मक बना दिया है और रुपये पर लगातार दबाव डाला है।

लगातार तीसरे दिन गिरावट दर्ज

रुपया मंगलवार को 23 पैसे कमजोर होकर 93.76 पर बंद हुआ था। बुधवार को अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये ने 93.94 पर खुलने के बाद 93.86 से 94.08 के दायरे में कारोबार किया और अंततः 94.05 पर बंद हुआ। शुक्रवार को शुरूआती कारोबार में यह गिरावट जारी रही और रुपये ने अब तक का सबसे निचला स्तर 94.24 छू लिया।

गिरावट के मुख्य कारण

  • विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा भारतीय बाजारों से लगातार पूंजी की निकासी।
  • ईरान और मध्य पूर्व में तनावपूर्ण स्थिति, जिससे वैश्विक निवेशक सतर्क हैं।
  • निवेशकों की धारणा पर नकारात्मक असर, जिससे विदेशी मुद्रा बाजार में दबाव बढ़ा।

विशेषज्ञों का कहना है कि रुपये की यह कमजोरी अस्थायी नहीं है और यदि मध्य पूर्व में तनाव बढ़ता रहा, तो आने वाले दिनों में भी रुपये पर दबाव बना रह सकता है।