नई दिल्ली: भारत के कॉरपोरेट जगत में एक महत्वपूर्ण कानूनी लड़ाई में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बड़ा फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने अदाणी ग्रुप की ₹14,535 करोड़ की बोली के जरिए जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) के अधिग्रहण पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
हालांकि, अदालत ने जेएएल की निगरानी कर रही मॉनिटरिंग कमेटी को निर्देश दिया कि एनसीएलएटी की अनुमति के बिना कोई भी बड़ा नीतिगत निर्णय न लिया जाए। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने सभी पक्षों, खासकर वेदांता लिमिटेड और अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड, से कहा कि वे अपनी दलीलें एनसीएलएटी के सामने रखें।
अदालत ने एनसीएलएटी को भी निर्देश दिया कि वह इस मामले की सुनवाई जल्द पूरा करे। एनसीएलएटी इस विवाद पर 10 अप्रैल से अंतिम सुनवाई शुरू करेगा।
विवाद की पृष्ठभूमि
जेएएल दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही थी और इसे कई कंपनियों ने अधिग्रहण के लिए लड़ा। नवंबर में कर्जदाताओं की समिति (CoC) ने अदाणी एंटरप्राइजेज की योजना को मंजूरी दी, जिसे बाद में एनसीएलटी ने भी हरी झंडी दिखाई।
इस फैसले को चुनौती देते हुए वेदांता ने सुप्रीम कोर्ट में दो अपीलें दायर की थीं:
- रेजोल्यूशन प्लान की वैधता पर सवाल
- CoC और एनसीएलटी द्वारा मंजूरी पर आपत्ति
इससे पहले:
- 24 मार्च को एनसीएलएटी ने अंतरिम रोक देने से इनकार किया था।
- 25 मार्च को वेदांता ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी।
- एनसीएलएटी ने जेएएल के कर्जदाताओं की समिति से जवाब मांगा।
अधिग्रहण पर क्या असर होगा?
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद फिलहाल अदाणी ग्रुप की बोली पर कोई रोक नहीं है, लेकिन अंतिम निर्णय एनसीएलएटी में होने वाली सुनवाई के बाद ही तय होगा। इस कदम से कंपनी अधिग्रहण प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहेगी और मॉनिटरिंग कमेटी के किसी भी बड़े निर्णय पर रोक लगाई गई है।