सिंगापुर में रहने वाली भारतीय समुदाय की तरक्की साफ नजर आ रही है। शिक्षा और आमदनी जैसे क्षेत्रों में पिछले कुछ सालों में काफी सुधार हुआ है। यह जानकारी सिंगापुर के गृह और कानून मंत्री के. शणमुगम ने दी। सिंगापुर की जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2000 में 25 साल और उससे ऊपर की उम्र वाले भारतीयों में केवल 16.5 प्रतिशत लोग ही ग्रेजुएट थे। लेकिन साल 2020 में यह आंकड़ा बढ़कर 41 प्रतिशत हो गया। यानी अब हर 10 भारतीयों में से लगभग 4 लोग ग्रेजुएट हैं। मंत्री शणमुगम ने बताया कि इसमें कुछ योगदान नए प्रवासियों का भी है, लेकिन अधिकतर सुधार स्थानीय भारतीय समुदाय की मेहनत और विकास के कारण हुआ है।
कम हुए स्कूल छोड़ने वाले
स्कूल छोड़ने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में भी बड़ी गिरावट आई है। साल 2000 में जहां 38 प्रतिशत भारतीय छात्र सेकेंडरी एजुकेशन पूरा नहीं कर पाते थे, वहीं 2020 में यह संख्या घटकर 18 प्रतिशत रह गई है। हालांकि मंत्री ने कहा कि इसमें और सुधार की जरूरत है। उनका कहना था, "हम बेहतर कर सकते हैं क्योंकि हर पांच में से एक छात्र का स्कूल छोड़ना भी ज्यादा है, लेकिन पहले तो यह चार में से एक था।"
भारतीयों की आमदनी में भी बड़ी बढ़ोतरी
भारतीय परिवारों की औसत मासिक आमदनी में 2010 से 2020 के बीच 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। बता दें कि, 2010 में मासिक आमदनी 6,000 सिंगापुर डॉलर थी और 2020 में यह बढ़कर 8,500 सिंगापुर डॉलर हो गई। 2024 में भी आमदनी में सुधार देखने को मिला है। रिपोर्ट के अनुसार, इस साल मासिक आमदनी में 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
सिंदा का विशेष योगदान
सिंगापुर इंडियन डेवलपमेंट एसोसिएशन (एसआईएनडीए) भारतीय समुदाय की शिक्षा और सामाजिक विकास में अहम भूमिका निभा रही है। 2024 में सिंदा ने लगभग 31,500 लोगों की मदद की। इसमें 578 सहयोगी संस्थाएं और 400 से ज्यादा स्वयंसेवक शामिल थे। इस दौरान सिंदा को 1.7 मिलियन सिंगापुर डॉलर का डोनेशन भी मिला। सिंदा के सीईओ अनबरासु राजेन्द्रन ने कहा कि यह सब समाज और साझेदारों के सहयोग से ही संभव हो सका है।