पश्चिम अफ्रीकी देश माली से बड़ी खबर सामने आई है। देश में हुए समन्वित हमलों के बीच रक्षा मंत्री जनरल सादियो कैमारा की मौत हो गई है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सैन्य सूत्रों ने इस घटना की पुष्टि की है। कैमारा की मौत को मौजूदा सैन्य शासन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

कैसे हुआ हमला

बताया जा रहा है कि एक दिन पहले काती शहर में स्थित उनके आवास को निशाना बनाया गया। काती माली का एक अहम सैन्य केंद्र है और राजधानी बमाको से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित है। हमलावरों ने यहां आत्मघाती कार बम का इस्तेमाल किया, जिससे भारी तबाही हुई।

किन संगठनों ने ली जिम्मेदारी

इन हमलों की जिम्मेदारी जमात नुसरत अल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन (अल-कायदा से जुड़ा संगठन) और अजावाद लिबरेशन फ्रंट (तुआरेग विद्रोही समूह) ने संयुक्त रूप से ली है। दोनों गुटों ने देश के कई सैन्य ठिकानों को एक साथ निशाना बनाया।

सुरक्षा पर उठे सवाल

यह हमला ऐसे इलाके में हुआ, जिसे देश के सबसे सुरक्षित क्षेत्रों में गिना जाता है। काती में ही अंतरिम राष्ट्रपति असिमी गोइता का भी निवास है। हालांकि हमले के बाद उन्हें तुरंत सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया और वे सुरक्षित बताए जा रहे हैं।

कौन थे सादियो कैमारा

जनरल सादियो कैमारा माली की सैन्य सरकार के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल थे। उन्होंने 2020 और 2021 में हुए तख्तापलट के बाद सत्ता में अहम भूमिका निभाई थी। उन्हें भविष्य में संभावित राष्ट्रपति के तौर पर भी देखा जा रहा था। उनकी मौत को सेना और सरकार दोनों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

देशभर में हमलों की श्रृंखला

हमले सिर्फ काती तक सीमित नहीं रहे, बल्कि बमाको, गाओ, किदाल और सेवारे जैसे इलाकों में भी हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं। उत्तरी क्षेत्रों में लगातार गोलीबारी और विस्फोटों की खबरें आ रही हैं, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण बनी हुई है।

खतरनाक गठबंधन बना कारण

विशेषज्ञों का मानना है कि ये हमले एक बड़े गठबंधन का परिणाम हैं। पहले आपस में संघर्ष करने वाले जेएनआईएम और एफएलए अब माली सरकार के खिलाफ एकजुट हो चुके हैं। बताया जा रहा है कि पिछले साल दोनों गुटों के बीच समझौता हुआ था, जिसके बाद इस तरह के समन्वित हमलों की आशंका बढ़ गई थी।