चेन्नई में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर दिए गए बयान के बाद सियासी माहौल गरमा गया है। खड़गे के कथित तौर पर प्रधानमंत्री को ‘आतंकवादी’ कहने वाले बयान पर विवाद खड़ा हो गया, हालांकि बाद में उन्होंने अपने शब्दों पर सफाई भी दी।

भाजपा ने इस टिप्पणी को बेहद आपत्तिजनक बताते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। भाजपा प्रवक्ता और पुरी से सांसद संबित पात्रा ने कहा कि यह कोई सामान्य बयान नहीं बल्कि सोच-समझकर की गई राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस लगातार प्रधानमंत्री के खिलाफ अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल कर रही है।

संबित पात्रा ने आगे कहा कि “कांग्रेस पहले भी कई विवादित व्यक्तियों के लिए नरम रुख अपनाती रही है, जबकि प्रधानमंत्री पर इस तरह की भाषा का प्रयोग लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है।” उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस का यह रवैया उसकी राजनीतिक हताशा को दर्शाता है।

भाजपा नेता विनोद तावड़े ने भी खड़गे के बयान की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे प्रधानमंत्री के लिए इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल दुर्भाग्यपूर्ण है और यह कांग्रेस की मानसिकता को उजागर करता है। उन्होंने खड़गे से माफी की मांग की।

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री पर इस तरह की टिप्पणी केवल व्यक्ति नहीं बल्कि पूरे देश का अपमान है। उन्होंने कांग्रेस और डीएमके पर मिलकर राजनीति को निम्न स्तर पर ले जाने का आरोप लगाया।

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने भी इसे लोकतांत्रिक परंपराओं पर हमला बताया, जबकि सांसद कमलजीत सेहरावत ने कहा कि कांग्रेस नेताओं की बयानबाजी उनकी राजनीतिक हताशा को दर्शाती है।

विवाद बढ़ने के बाद मल्लिकार्जुन खड़गे ने सफाई देते हुए कहा कि उनका इरादा प्रधानमंत्री को आतंकवादी कहने का नहीं था। उन्होंने कहा कि उनका मतलब था कि सरकार विपक्षी दलों पर दबाव बनाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल करती है और राजनीतिक स्तर पर डराने की कोशिश करती है।

इस बयान के बाद राजनीतिक दलों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है और मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है।