नई दिल्ली: गैर-सरकारी संगठनों (NGO) को मिलने वाली विदेशी फंडिंग के दुरुपयोग को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने नियमों को और कड़ा करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इसी उद्देश्य से सरकार ने विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) में संशोधन से जुड़ा विधेयक लोकसभा में पेश किया है।

प्रस्तावित संशोधन के अनुसार यदि किसी संस्था का एफसीआरए लाइसेंस रद्द या समाप्त हो जाता है, तो विदेशी अनुदान से बनाई गई संपत्तियों को जब्त किया जा सकेगा। इसके साथ ही ऐसी संपत्तियों की निगरानी और प्रबंधन के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर नई प्राधिकरण (अथॉरिटी) गठित करने का भी प्रावधान रखा गया है।

विपक्ष ने जताई आपत्ति

विधेयक को लेकर विपक्ष ने इसे “खतरनाक” बताते हुए आपत्ति जताई। इस पर जवाब देते हुए गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि यह कानून केवल उन लोगों के लिए खतरनाक है जो विदेशी फंड का उपयोग जबरन धर्मांतरण या निजी लाभ के लिए करते हैं।

देश में कितने एनजीओ को मिलती है विदेशी मदद

सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में करीब 16 हजार एनजीओ के पास एफसीआरए लाइसेंस है। इन संस्थाओं को हर साल लगभग 22 हजार करोड़ रुपये की विदेशी सहायता प्राप्त होती है।

नित्यानंद राय ने बताया कि वर्ष 2010 के एफसीआरए कानून में कई प्रावधान स्पष्ट नहीं थे, जिसके कारण नियमों का उल्लंघन करने वाले संगठनों पर कार्रवाई करना कठिन हो जाता था। नए संशोधन में इन प्रावधानों को स्पष्ट करते हुए विदेशी फंड और उससे बनाई गई संपत्तियों के प्रबंधन, निगरानी और निपटान के लिए एक व्यापक कानूनी ढांचा प्रस्तावित किया गया है।

नियमों में क्या होगा बदलाव

नए प्रावधानों के तहत विदेशी अनुदान प्राप्त करने और उसके उपयोग के लिए निर्धारित समय-सीमा तय की जाएगी। यदि किसी संस्था का एफसीआरए प्रमाणपत्र समाप्त हो जाता है और समय पर नवीनीकरण के लिए आवेदन नहीं किया जाता या आवेदन अस्वीकार हो जाता है, तो वह प्रमाणपत्र स्वतः निरस्त माना जाएगा।

ऐसी स्थिति में संबंधित संस्था नवीनीकरण होने तक विदेशी फंड न तो प्राप्त कर सकेगी और न ही उसका उपयोग कर पाएगी

सजा के प्रावधान में बदलाव

विधेयक पेश करते हुए नित्यानंद राय ने कहा कि सरकार विदेशी फंडिंग के किसी भी प्रकार के दुरुपयोग को बर्दाश्त नहीं करेगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि नए संशोधन में दंड प्रावधान में बदलाव करते हुए सजा की अवधि पांच साल से घटाकर एक साल करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।