दिल्ली प्रदर्शन में कथित हिंसा पर 4 FIR, 18 हिरासत में; महिला पत्रकारों के आरोपों पर पुलिस की सफाई

HIGHLIGHTS
- पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में चार एफआईआर दर्ज की गईं।
- पुलिस ने कार्रवाई के दौरान 18 लोगों को हिरासत में लिया।
- महिला प्रदर्शनकारियों से मारपीट के आरोपों को पुलिस ने खारिज किया।
नई दिल्ली। सोमवार को हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान कथित हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस ने पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में चार एफआईआर दर्ज की हैं। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान 18 लोगों को हिरासत में लिया है। वहीं, महिला प्रदर्शनकारियों पर शारीरिक हमले के आरोपों को दिल्ली पुलिस ने निराधार और भ्रामक बताया है।
महिला प्रदर्शनकारियों पर यौन हमले के आरोप पर दिल्ली पुलिस की सफाई
दिल्ली पुलिस ने सोमवार को सोशल मीडिया पर किए गए उन दावों को खारिज किया, जिनमें दिल्ली में हालिया प्रदर्शनों के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट का आरोप लगाया गया था। पुलिस का कहना है कि महिला प्रदर्शनकारियों को महिला पुलिसकर्मियों ने संभाला और तय प्रक्रिया के अनुसार उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार किया गया।
नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा ने इन आरोपों को बेबुनियाद और गुमराह करने वाला बताया। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि सोशल मीडिया पर कुछ हैंडल महिला प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट का दावा कर रहे हैं, जबकि ये आरोप घटनाओं के वास्तविक क्रम को नहीं दर्शाते। उन्होंने कहा कि महिला प्रदर्शनकारियों को महिला स्टाफ ने संभाला और उनके साथ सम्मान तथा उचित लिहाज से व्यवहार किया गया।
महिला पत्रकारों से कथित बदसलूकी का मामला
तीन अक्टूबर को जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकारों से कथित बदसलूकी का मामला लगातार बढ़ता जा रहा है। घटना के बाद से ही संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन शुरू हो गया था। प्रदर्शनकारियों ने रविवार रातभर थाने के बाहर डेरा डालकर पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
सोमवार सुबह पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाना शुरू किया और कई लोगों को हिरासत में लिया। वहीं, पूर्व नौकरशाहों के विरोध मार्च को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है। यह मार्च ईसीआई की ओर होना है। रफी मार्ग और संसद मार्ग पर सुरक्षा बढ़ाई गई है।
सीजेपी ने की एफआईआर दर्ज करने की मांग
महिला पत्रकारों से कथित बदसलूकी के मामले में एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के सह-संस्थापक सौरभ दास और रतना दास रविवार को संसद मार्ग थाने पहुंचे। सौरभ दास ने दिल्ली पुलिस पर एसीपी विवेक भगत को बचाने और एफआईआर दर्ज नहीं करने का आरोप लगाया।
उन्होंने पुलिस को सोमवार दोपहर 12 बजे तक एफआईआर दर्ज करने का समय दिया।
संसद मार्ग थाने पर 'आप' का प्रदर्शन
महिला पत्रकारों के साथ कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में रविवार को आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन किया। आम आदमी पार्टी दिल्ली के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि आम लोगों की शिकायत पर पुलिस तुरंत एफआईआर दर्ज करती है, लेकिन किसी पुलिस अधिकारी के खिलाफ शिकायत आने पर कार्रवाई नहीं की जा रही है।
उन्होंने पुलिस पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। भारद्वाज ने कहा कि एफआईआर दर्ज होने तक पार्टी का आंदोलन जारी रहेगा। विधायक संजीव झा और कुलदीप कुमार ने भी शिकायत के आधार पर कानून के मुताबिक कार्रवाई करने और एसीपी के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की।
तीन महिला पत्रकारों ने पुलिसकर्मियों पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया
दिल्ली के जंतर-मंतर पर तीन अक्टूबर को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने पुलिसकर्मियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। एक महिला पत्रकार ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर आरोप लगाया था कि एक पुलिस अधिकारी ने उसे गलत तरीके से छुआ।
पत्रकार के मुताबिक, वह एसीपी विवेक भगत के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन गई थीं, लेकिन तीन घंटे से अधिक समय बीतने के बाद भी उनके खिलाफ कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। इन आरोपों के बाद दिल्ली पुलिस ने शिकायतों को निष्पक्ष जांच के लिए अपराध शाखा को स्थानांतरित कर दिया है।
दिल्ली पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पीड़ित महिला पत्रकारों में से एक ने आरोप लगाया है कि एक सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) ने उसका यौन उत्पीड़न किया। प्रदर्शन के दौरान हुई कथित घटनाओं को लेकर नई दिल्ली जिला पुलिस को शिकायतें मिली हैं। उस समय कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी।
अधिकारियों ने बताया कि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए नई दिल्ली जिला पुलिस ने शिकायतों को अपराध शाखा को सौंप दिया है। तीनों महिला पत्रकारों ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ आरोप लगाए हैं। दिल्ली पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, अपराध शाखा इन आरोपों की गहन जांच करेगी और शिकायतकर्ता महिला पत्रकारों तथा संबंधित लोगों के बयान दर्ज करेगी।
एक पीड़िता ने बताया कि वह और अन्य लोग प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए थाने पहुंचे थे। उनका आरोप है कि कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले रहे थे और मौके पर कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी।
पीड़िता के अनुसार, उन्होंने दिल्ली पुलिस के एसीपी विवेक भगत से महिला पुलिसकर्मियों की अनुपस्थिति के बारे में पूछा, जिसके बाद उन्होंने उसका यौन उत्पीड़न किया और उसे पीछे धकेल दिया। हालांकि, बार-बार फोन करने और संदेश भेजने के बावजूद एसीपी विवेक भगत से संपर्क नहीं हो सका।
शनिवार को क्या हुआ
शनिवार को महिला पत्रकारों में से एक ने आरोप लगाया कि एक असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (एसीपी) ने उसके साथ यौन उत्पीड़न किया। अधिकारी ने बताया कि विरोध-प्रदर्शन के दौरान हुई कथित घटनाओं के बाद नई दिल्ली जिला पुलिस को शिकायतें मिली थीं। उस समय कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया था।
पुलिस अधिकारी ने कहा कि अपराध शाखा आरोपों की जांच करेगी और जांच के तहत शिकायतकर्ताओं तथा अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जाएंगे। एक पीड़िता ने बताया कि इसके बाद वह और अन्य लोग प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए पुलिस स्टेशन गए थे, लेकिन आरोप लगाया कि अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
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