दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान AISA अध्यक्ष नेहा बोरा हिरासत में, बाद में हुई रिहा

HIGHLIGHTS
- आइसा कार्यकर्ता लगातार तीसरे दिन जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश में थे
- प्रदर्शनकारियों को आंध्र भवन सर्किल के पास रोका गया
- बैरिकेड पार करने को लेकर पुलिस से झड़प हुई
नई दिल्ली। दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को पुलिस ने हिरासत में लिया। आइसा के सदस्यों ने आरोप लगाया कि नेहा को बिना आधिकारिक नंबर प्लेट वाली निजी गाड़ी में ले जाया गया। उस दौरान उनके साथी और समर्थक उनकी जानकारी हासिल नहीं कर पा रहे थे। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि गाड़ी में कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी। बाद में नेहा को नरेला औद्योगिक क्षेत्र थाने से रिहा कर दिया गया।
विपक्षी नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर क्या कहा?
नेहा को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आने के बाद विपक्षी नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद डेरेक ओब्रायन ने उनकी रिहाई पर राहत जताई। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, 'चिंतित था... यह जानकर राहत मिली कि नेहा को पुलिस की गाड़ी में ले जाने के बाद अब नरेला थाने से रिहा कर दिया गया है। बैठकों से आगे बढ़कर इंडिया गठबंधन जमीन पर भी मजबूती से मौजूद है।'
वहीं, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने नेहा को हिरासत में लिए जाने को अपहरण बताया था। रिहाई के बाद उन्होंने कहा कि एक महिला कार्यकर्ता को बिना नंबर प्लेट वाली पुरुषों की गाड़ी में ले जाना और मानसिक रूप से परेशान करने के बाद छोड़ना दिल्ली पुलिस के लिए बेहद निचले स्तर की कार्रवाई है।
मनोज झा और माकपा ने क्या आरोप लगाए?
राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज झा ने भी पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस भले ही किसी 'सम्राट' के आदेश पर काम कर रही हो, लेकिन उसे कम से कम एक बार सोचना चाहिए कि आम परिवारों के सदस्यों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन तस्वीरों का असर लोगों के मन में लंबे समय तक रहेगा और इतिहास गवाह है कि कोई भी 'शाह' हमेशा शाह नहीं रहता। उन्होंने दावा किया कि लोकतंत्र करवट ले रहा है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने भी आरोप लगाया कि संसद मार्ग के पास पुलिस ने छात्राओं और युवाओं को मनमाने तरीके से हिरासत में लिया। पार्टी ने सवाल उठाया कि एक महिला पत्रकार की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई, जबकि उन्होंने प्रदर्शन के दौरान एक पुलिस अधिकारी पर अनुचित तरीके से छूने का आरोप लगाया था।
महिला पत्रकारों ने पुलिस पर क्या आरोप लगाए?
तीन महिला पत्रकारों ने आरोप लगाया है कि तीन अक्तूबर को जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन की कवरेज के दौरान पुलिसकर्मियों ने उनका यौन उत्पीड़न किया। दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार, इन शिकायतों को निष्पक्ष जांच के लिए अपराध शाखा को सौंप दिया गया है।
इस मामले में पुलिस की कार्रवाई और शिकायतों की जांच को लेकर विवाद बढ़ गया है। हालांकि, पुलिस ने नेहा को हिरासत में लेने को लेकर लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है।
क्यों आंदोलन कर रहे हैं छात्र?
आइसा के कार्यकर्ता लगातार तीसरे दिन जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश कर रहे थे। उनकी मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की है। प्रदर्शनकारी आंध्र भवन सर्किल से जंतर-मंतर की ओर बढ़े, लेकिन भारी पुलिस बल और बैरिकेडिंग के चलते उन्हें रोकने की कोशिश की गई।
इस दौरान बैरिकेड पार करने को लेकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कुछ देर के लिए झड़प भी हुई। यह आंदोलन चुनाव आयोग के कामकाज में कथित अनियमितताओं, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोपों को लेकर चल रहा है।
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