अंकिता भंडारी केस: राहुल गांधी का मोदी सरकार पर हमला, बोले- पीड़ितों की आवाज दबाना पहचान बन गई

HIGHLIGHTS
- अंकिता भंडारी के माता-पिता को गुरुवार सुबह करीब 5 बजे रिहा किया गया।
- परिवार की मांग है कि सीबीआई जांच पूरी होने तक दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति पर रोक लगाई जाए।
- राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने एक दिन पहले अंकिता के माता-पिता से मुलाकात की थी।
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने उत्तराखंड में 2022 में हुई 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की हत्या के मामले में उसके माता-पिता को हिरासत में लिए जाने पर सवाल उठाए। राहुल गांधी ने कहा कि पीड़ितों की आवाज दबाना और सवाल पूछने वालों को रास्ते से हटाना इस सरकार की पहचान बन गई है।
अंकिता भंडारी के माता-पिता को गुरुवार सुबह रिहा कर दिया गया। इससे कुछ घंटे पहले वे इंडिया गेट के पास विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, जहां उन्हें हिरासत में लिया गया था। उनका प्रदर्शन दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के विरोध में था।
राहुल गांधी ने क्या कहा?
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि सुबह चार बजे, जब दुनिया सो रही थी, तब अंकिता भंडारी के माता-पिता को हिरासत में ले लिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर उनका अपराध क्या था। राहुल के मुताबिक, वे इंडिया गेट पर शांतिपूर्वक बैठे थे और उनकी मांग थी कि सीबीआई जांच पूरी होने तक दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त न किया जाए।
सरकार की क्या पहचान है?
राहुल गांधी ने कहा कि वह और प्रियंका गांधी एक दिन पहले अंकिता के माता-पिता से मिले थे। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच के नतीजे आने से पहले ही नियुक्ति की प्रक्रिया जल्दबाजी में पूरी कर दी गई। इसके बाद सवाल उठाने वाले माता-पिता को आधी रात को हिरासत में ले लिया गया।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि इस सरकार की पहचान पीड़ितों की आवाज दबाना और सवाल पूछने वालों को रास्ते से हटाना है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि न्याय की लड़ाई न तो दबेगी और न ही रुकेगी। 'जस्टिस फॉर अंकिता भंडारी' हैशटैग के साथ राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस अंकिता के परिवार के साथ खड़ी है और न्याय मिलने तक उनका साथ देती रहेगी।
अंकिता के पिता ने क्या चेतावनी दी?
सूत्रों के मुताबिक, अंकिता के माता-पिता को गुरुवार सुबह करीब पांच बजे रिहा कर दिया गया। अंकिता के पिता ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार उनकी मांग स्वीकार नहीं करती है, तो वे देशव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे।
परिवार का आरोप है कि अंकिता की मौत के मामले में दुष्यंत कुमार गौतम की अहम भूमिका थी।
किसे-किसे हिरासत में लिया गया?
अंकिता के माता-पिता के अलावा कांग्रेस के कई नेताओं को भी हिरासत में लिया गया था। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया। इनमें कांग्रेस के मीडिया और प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा, सांसद इमरान प्रतापगढ़ी, सोशल मीडिया विभाग की प्रमुख सुप्रिया श्रीनेत और इंडियन यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब शामिल हैं।
अंकिता के माता-पिता की मांग है कि सीबीआई जांच पूरी होने तक दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम के राज्यपाल के रूप में नियुक्ति पर रोक लगाई जाए।
क्या है पूरा मामला?
अंकिता भंडारी ऋषिकेश के वनंत्रा रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थीं। 18 सितंबर 2022 को उनकी हत्या कर दी गई थी। चार दिन बाद उनका शव चिल्ला नहर से बरामद हुआ था।
इस मामले में रिसॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य, जो पूर्व भाजपा नेता विनोद आर्य के बेटे हैं, और उनके दो साथियों को दोषी ठहराया गया था। तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।
मामले ने उस समय राजनीतिक तूल पकड़ लिया, जब अपराध में किसी अज्ञात वीआईपी के शामिल होने के आरोप सामने आए। अंकिता के परिवार और कार्यकर्ताओं ने इस कथित वीआईपी एंगल की जांच की मांग की है। इन आरोपों के सिलसिले में दुष्यंत कुमार गौतम का नाम भी सामने आया है।
गौतम ने अपने खिलाफ लगे आरोपों से इनकार किया है और मानहानि की कानूनी कार्रवाई शुरू की है। कांग्रेस का दावा है कि गौतम को बचाने के लिए उनकी नियुक्ति की गई है। पार्टी का तर्क है कि राज्यपाल पद पर रहते हुए किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही नहीं की जा सकती।
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