भाजपा का आरोप- सोनिया गांधी ने ‘वंदे मातरम्’ रुकवाने की कोशिश की, कांग्रेस ने दी सफाई

HIGHLIGHTS
- लाल किले पर पहली बार स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम’ गाया गया।
- भाजपा ने कांग्रेस मुख्यालय के कार्यक्रम का वीडियो साझा कर सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर सवाल उठाए।
- कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण गाने की बात कही।
आज 15 अगस्त के अवसर पर लाल किले पर पहली बार ‘वंदे मातरम’ का गायन किया गया। स्वतंत्रता दिवस से जुड़े कार्यक्रमों में भी ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान से पहले गाया गया। इसी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज रही। भाजपा ने कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधा।
वंदे मातरम के दौरान कांग्रेस नेताओं का वीडियो साझा किया
भाजपा ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर कांग्रेस मुख्यालय में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के दौरान का एक वीडियो साझा किया। वीडियो में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी दिखाई दे रहे हैं। भाजपा ने दावा किया कि ‘वंदे मातरम’ के गायन के दौरान सोनिया गांधी और राहुल गांधी असहज नजर आए।
भाजपा ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाया?
भाजपा ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि ‘वंदे मातरम’ की शुरुआती पंक्तियों के बाद सोनिया गांधी असहज दिखाई दीं और उन्होंने गीत रोकने का संकेत दिया। भाजपा ने राहुल गांधी को भी पूरे गायन के दौरान और राष्ट्रगीत समाप्त होने तक परेशान बताया।
भाजपा ने सवाल उठाया कि गांधी परिवार को भारत की सांस्कृतिक चेतना, सभ्यतागत विरासत और राष्ट्रभाव से इतनी असहजता क्यों है।
‘वंदे मातरम’ की रचना 1875 में बंकिम चंद्र चटर्जी ने की थी। 1950 में संविधान सभा ने इसे भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया था। नोबेल पुरस्कार विजेता रविंद्रनाथ टैगोर ने 1896 में कलकत्ता में हुए कांग्रेस अधिवेशन में इसे पहली बार गाया था। 1905 में बंगाल विभाजन के बाद देशभर में शुरू हुए आंदोलन के दौरान ‘वंदे मातरम’ अंग्रेजों के खिलाफ विरोध का नारा बन गया था।
कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को खारिज किया
कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उसके स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण गाया गया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पार्टी के साथ इस गीत के ऐतिहासिक जुड़ाव का जिक्र करते हुए 1937 में कलकत्ता में हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक का हवाला दिया।
जयराम रमेश ने बताया कि 28 अक्टूबर 1937 को कलकत्ता में हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर कांग्रेस के अधिवेशनों में ‘वंदे मातरम’ के शुरुआती छंद गाने का फैसला लिया गया था। उन्होंने कहा कि तब से कांग्रेस के अधिवेशनों में इन पंक्तियों का गायन होता रहा है और पार्टी के सेवा दल तथा कार्यकर्ता भी इसे गाते हैं।
रमेश ने कहा कि आज इंदिरा भवन में ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण गाया गया और इसे लेकर किसी तरह के विवाद का सवाल नहीं है।
सोनिया गांधी के वीडियो पर कांग्रेस की अलग व्याख्या
भाजपा के इस आरोप पर कि सोनिया गांधी ने ‘वंदे मातरम’ का पूरा गायन रोकने की कोशिश की, जयराम रमेश ने वीडियो में दिखाई दे रहे घटनाक्रम की अलग व्याख्या की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष लंबे समय से खड़ी थीं, इसलिए सोनिया गांधी उनके लिए कुर्सी मांग रही थीं।
‘वंदे मातरम’ को लेकर पहले भी हुआ विवाद
‘वंदे मातरम’ के शुरुआती दो छंदों में मातृभूमि की सुंदरता, हरियाली, पानी, फसल और मां के रूप में स्तुति की गई है। बाद के छंदों में हिंदू देवियों मां दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती का उल्लेख आता है। इसी हिस्से को लेकर कुछ मुस्लिम नेताओं और संगठनों ने आपत्ति जताई थी।
1930 में देश में धर्म आधारित राजनीति के उभार के बीच ‘वंदे मातरम’ का विरोध शुरू हुआ। विवाद बढ़ने के बाद कांग्रेस ने इसके केवल दो छंदों को गाने का फैसला किया। इसके बाद 1937 में फैजाबाद अधिवेशन में कांग्रेस ने तय किया कि राष्ट्रीय आयोजनों में ‘वंदे मातरम’ के दो ही छंद गाए जाएंगे।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.



















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.