क्या सोनिया गांधी ने पूरा ‘वंदे मातरम्’ गाने से रोका? BJP के आरोप पर कांग्रेस ने दिया जवाब

HIGHLIGHTS
- नई दिल्ली के इंदिरा भवन में कांग्रेस के स्वतंत्रता दिवस समारोह को लेकर सियासी विवाद।
- BJP ने सोनिया गांधी पर ‘वंदे मातरम्’ का पूरा वर्जन गाए जाने पर आपत्ति जताने का आरोप लगाया।
- कांग्रेस ने ‘वंदे मातरम्’ के पूरे वर्जन को गाने से रोकने के आरोपों को खारिज किया।
- कांग्रेस ने कहा कि सोनिया गांधी केवल मल्लिकार्जुन खरगे के लिए कुर्सी मांग रही थीं।
नई दिल्ली। देशभर में शनिवार को 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस मनाया गया। घरों, सड़कों और विभिन्न भवनों में स्वतंत्रता दिवस की धूम रही। नई दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में भी कांग्रेस की ओर से स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित किया गया। इस समारोह की एक वीडियो क्लिप को लेकर अब राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।
इंदिरा भवन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, CPP चेयरपर्सन सोनिया गांधी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी समारोह में शामिल हुए। कार्यक्रम से सामने आई एक क्लिप को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए सोनिया गांधी पर आरोप लगाए हैं।
‘वंदे मातरम्’ को लेकर BJP का कांग्रेस पर हमला
बीजेपी ने 15 अगस्त के मौके पर आरोप लगाया कि कांग्रेस के स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का पूरा वर्शन गाए जाने पर सोनिया गांधी ने आपत्ति जताई।
बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष ने कांग्रेस के कार्यक्रम की वीडियो क्लिप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की। उन्होंने कहा, ‘मां, बेटा और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष ‘वंदे मातरम्’ का पूरा वर्शन गाए जाने से परेशान दिख रहे हैं। कुछ लोगों की सोच 1947 से पहले और उसके बाद भी कभी नहीं बदलती।’
बीजेपी प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, ‘स्वतंत्रता दिवस पर आज जो दृश्य सामने आया है, वह बेहद शर्मनाक है। भारत के राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के गायन के दौरान सोनिया गांधी की आपत्ति और कांग्रेस कार्यकर्ताओं से यह पूछना कि इसे क्यों बजाया जा रहा था, कांग्रेस पार्टी की सोच को उजागर करता है।’
उन्होंने कांग्रेस पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘क्या यह वही कांग्रेस है जो देश के स्वतंत्रता संग्राम की विरासत का दावा करती है? वंदे मातरम् के प्रति कांग्रेस का रवैया लोगों को पार्टी की आपातकाल वाली सोच की याद दिलाता है। देश की जनता ने इस सोच को नकार दिया है और आगे भी नकारती रहेगी।’
कांग्रेस ने आरोपों को बताया गलत
वहीं, कांग्रेस ने बीजेपी के आरोपों को खारिज कर दिया। पार्टी ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ के पूरे वर्शन को गाए जाने से रोकने की कोई कोशिश नहीं हुई। कांग्रेस के मुताबिक, सोनिया गांधी केवल मल्लिकार्जुन खरगे के लिए कुर्सी मांग रही थीं।
विवाद बढ़ने के बाद कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने 28 अक्टूबर 1937 को कलकत्ता में हुई कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस बैठक में महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, सरदार वल्लभभाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद, जवाहरलाल नेहरू, गोविंद बल्लभ पंत और सी. राजगोपालाचारी मौजूद थे।
जयराम रमेश ने बताया कि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह के बाद यह तय किया गया था कि कांग्रेस के सत्रों में ‘वंदे मातरम्’ के शुरुआती पद गाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि टैगोर ने नेहरू और बोस को सलाह दी थी कि ‘वंदे मातरम्’ के शुरुआती कुछ पैराग्राफ ही इस्तेमाल किए जाएं।
कांग्रेस महासचिव ने आगे कहा, ‘तब से हम हर सत्र में वे पंक्तियां गाते आ रहे हैं, हमारा सेवा दल इसे गाता है, हमारे कार्यकर्ता इसे गाते हैं, इस पर कोई विवाद नहीं है।’
जयराम रमेश ने जोर देकर कहा, ‘आज शनिवार को राष्ट्रगीत का पूरा संस्करण गाया गया था, इस पर विवाद का कोई सवाल ही नहीं उठता।’
बीजेपी नेताओं के आरोपों को लेकर पूछे जाने पर कांग्रेस नेता ने स्पष्ट रूप से इन्हें खारिज किया और कहा कि गीत का पूरा संस्करण गाने से रोकने की कोई कोशिश नहीं की गई थी।
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