‘370 नहीं हटता तो POK में उठती आवाजें’: उमर अब्दुल्ला ने कहा- वहां के लोग हमारे अपने

HIGHLIGHTS
- उमर अब्दुल्ला ने भारत में जम्मू-कश्मीर के विलय के फैसले को सही बताया।
- सीएम ने विशेष दर्जे और पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग दोहराई।
- पीओके के लोगों को अपना बताते हुए उनके लिए विधानसभा में सीटें सुरक्षित होने की बात कही।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 80 साल पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं द्वारा भारत में विलय के ऐतिहासिक फैसले को सही करार दिया। शनिवार को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उन्होंने देश के संघीय ढांचे को बनाए रखने के लिए जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे और पूर्ण राज्य की बहाली की अपनी मांग एक बार फिर पुरजोर तरीके से उठाई।
पीओके और अनुच्छेद 370 पर बड़ा बयान
बख्शी स्टेडियम में स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि 2019 में जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म नहीं किया गया होता, तो आज पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के लोग जम्मू-कश्मीर के साथ फिर से जुड़ने के लिए प्रदर्शन कर रहे होते।
पीओके के लोग हमारे अपने हैं
पीओके के निवासियों की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए उमर अब्दुल्ला ने दोहराया कि भारत उन्हें अपना मानता है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पीओके के प्रतिनिधियों के लिए आज भी सीटें सुरक्षित रखी गई हैं और उम्मीद है कि एक दिन वे उन सीटों पर काबिज होंगे।
शहीदों को श्रद्धांजलि और विलय के फैसले का जिक्र
उमर अब्दुल्ला ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के संस्थापक शेख मुहम्मद अब्दुल्ला और उन स्थानीय स्वयंसेवकों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने 1947 में भारतीय सेना के पहुंचने से पहले सीमा पार से आए हमलावरों का मुकाबला करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी थी।
उन्होंने कहा कि जब वह सीमा पार और नियंत्रण रेखा (एलओसी) के हालात देखते हैं, तो उन्हें एहसास होता है कि उनके पूर्वजों का नारा- 'हमलावर खबरदार, हम कश्मीरी हैं तैयार' बिल्कुल सही था। उन्होंने कहा कि 80 साल पहले उनके नेताओं ने जो फैसला लिया था, वह एकदम सही था।
इस दौरान उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता मास्टर अब्दुल अजीज को भी याद किया, जो मुजफ्फराबाद में पाकिस्तानी सेना समर्थित कबाइलियों के आक्रमण को रोकने की कोशिश में शहीद हो गए थे।
संघवाद की रक्षा और संवैधानिक गारंटी की वापसी
मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र और संघवाद को देश के दो बड़े स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि भारत राज्यों का एक संघ है और संघवाद को बचाने व मजबूत करने की शुरुआत जम्मू-कश्मीर से होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जो कुछ भी जम्मू-कश्मीर से छीना गया है, उसे वापस किया जाना चाहिए, ताकि उसकी पहचान सिर्फ शब्दों में नहीं बल्कि व्यवहार में भी दिखाई दे। उन्होंने कहा कि शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि तभी मिलेगी, जब उनके सपनों को पूरा किया जाएगा। इसमें राज्य का दर्जा वापस पाना और नई प्रगति की शुरुआत करना शामिल है।
केंद्रीयकरण और NEET/JEE जैसी परीक्षाओं पर निशाना
शासन के केंद्रीकृत मॉडल पर चिंता जताते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जब केंद्रीय एजेंसियां राज्यों की स्वायत्तता को कमजोर करती हैं, तो संघवाद को नुकसान पहुंचता है।
उन्होंने NEET और JEE जैसी प्रवेश परीक्षाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि IIT और IIM जैसे राष्ट्रीय संस्थानों के लिए ऐसी केंद्रीय परीक्षाएं उचित हैं, लेकिन राज्य द्वारा संचालित शिक्षण संस्थानों को अपने दाखिले आयोजित करने का अधिकार बरकरार रखना चाहिए। उन्होंने दिल्ली और जम्मू-कश्मीर में हाल में हुए छात्र विरोध प्रदर्शनों को इसी केंद्रीकृत व्यवस्था की ज्यादती का परिणाम बताया।
पारदर्शी शासन और युवाओं को भरोसा
अपने संबोधन के अंत में उमर अब्दुल्ला ने जनता को भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार पारदर्शी, मेरिट आधारित भर्ती और जवाबदेह शासन देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने प्रशासन की ओर से युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने और उन्हें अंधेरे से उजाले की ओर ले जाने का संकल्प लिया।
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