भाजपा विधायक रेखा पात्रा ने जिला संगठन पर लगाए अपमानित करने और गुमराह करने के आरोप

HIGHLIGHTS
- रेखा पात्रा ने कहा कि वह अपने निर्वाचन क्षेत्र में रहकर लोगों के बीच काम करती हैं।
- उन्होंने सोशल मीडिया पर राजनीतिक गतिविधियों के प्रचार को ज्यादा महत्व नहीं देने की बात कही।
- बशीरहाट जिला भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी ने उन्हें उचित सम्मान देने की हमेशा कोशिश की है।
संदेशखाली आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल रहीं भाजपा विधायक रेखा पात्रा ने अपनी ही पार्टी के संगठन के एक वर्ग पर सवाल उठाए हैं। हिंगलगंज की विधायक ने बशीरहाट संगठनात्मक जिला नेतृत्व के एक हिस्से पर बार-बार अपमानित करने और उनकी औपचारिक शिक्षा की कमी का हवाला देकर उन्हें गुमराह करने का आरोप लगाया है।
रेखा पात्रा ने कहा कि वह जिला इकाई की ओर से आयोजित कार्यक्रमों में शामिल नहीं होती हैं, क्योंकि वहां उन्हें असहयोग और कथित अनादर का सामना करना पड़ा है। उन्होंने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से इस मामले में हस्तक्षेप कर उन्हें न्याय दिलाने की अपील भी की।
रेखा पात्रा ने जिला नेतृत्व पर क्या आरोप लगाए?
रेखा पात्रा ने संवाददाताओं से कहा कि जिला नेतृत्व उन्हें गुमराह करता है, इसलिए वह उनके द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में शामिल नहीं होतीं। उन्होंने कहा कि वह अपने निर्वाचन क्षेत्र में रहकर काम करती हैं।
विधायक ने आरोप लगाया कि बशीरहाट संगठनात्मक जिला समिति के कुछ सदस्य उनकी औपचारिक शिक्षा की कमी का फायदा उठाकर उन्हें गलत दिशा में ले जाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें पढ़ाई-लिखाई की ज्यादा जानकारी नहीं होने के कारण जिला समिति उन्हें गुमराह करती है और कार्यक्रमों में बुलाए जाने के बावजूद उनका अपमान किया जाता है।
पात्रा ने कहा कि उन्हें इस तरह का व्यवहार पसंद नहीं है। उनका यह सार्वजनिक असंतोष ऐसे समय सामने आया है, जब राज्य में भाजपा की सरकार है और आगामी पंचायत चुनाव भी नजदीक हैं।
संगठन के एक वर्ग से नाराजगी, पार्टी से नहीं
जिला नेतृत्व की आलोचना करने के बावजूद रेखा पात्रा ने साफ किया कि उनकी नाराजगी भाजपा या उसकी सरकार से नहीं, बल्कि संगठन के एक वर्ग से है। उन्होंने कहा कि पार्टी संगठनात्मक जिला, मंडल या बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं की वजह से नहीं रुकती और पार्टी अपने तरीके से आगे बढ़ती है।
विधायक ने राज्य सरकार की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार ऊंचाइयों तक जाएगी और सत्ता में आने के बाद से ही काम कर रही है। उनके मुताबिक, सरकार ने काम शुरू करने में एक पल की भी देरी नहीं की।
रेखा पात्रा ने राजनीतिक गतिविधियों को सोशल मीडिया पर दिखाने को भी ज्यादा महत्व नहीं दिया। उन्होंने कहा कि उनका ध्यान प्रचार करने के बजाय अपने निर्वाचन क्षेत्र में काम करने पर है।
उन्होंने बताया कि हिंगलगंज में उनके कार्यक्रमों में मंडल और बूथ स्तर के कार्यकर्ता शामिल होते हैं और वे इन गतिविधियों से परिचित हैं, भले ही हर कार्यक्रम की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा न की जाती हो।
पात्रा ने कहा कि वह उन नेताओं की तरह नहीं हैं, जो राजनीति में बने रहने या बड़ा नेता बनने के लिए हर समय सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं। उन्होंने बताया कि उनके कार्यालय में मदद मांगने वाले लोगों की भीड़ रहती है और वह उनकी समस्याएं सुनने में काफी समय देती हैं।
जिला भाजपा ने क्या कहा?
वहीं, जिला भाजपा ने इस विवाद को ज्यादा तूल नहीं दिया। बशीरहाट संगठनात्मक जिला अध्यक्ष सुकल्याण बैद्य ने कहा कि पार्टी ने रेखा पात्रा को विधायक और जिला समिति सदस्य के तौर पर उचित सम्मान देने की हमेशा कोशिश की है।
बैद्य ने कहा कि जिला समिति के कार्यकर्ता और विधायक के तौर पर उन्हें जो सम्मान मिलना चाहिए, वह देने का प्रयास पार्टी ने हमेशा किया है। उन्होंने कहा कि रेखा पात्रा को कुछ महसूस हुआ होगा, यह उनका मामला है और इस बारे में वह कुछ नहीं कहना चाहते।
पंचायत चुनाव नजदीक होने के बीच बैद्य ने कहा कि यह मतभेद पार्टी की चुनावी तैयारियों में बाधा नहीं बनेगा। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में पार्टी साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी। वरिष्ठ नेता मौजूद हैं और वे इस मामले को देख रहे हैं। उनके निर्देश के अनुसार ही आगे काम किया जाएगा।
कैसा रहा रेखा पात्रा का राजनीतिक सफर?
रेखा पात्रा का राजनीतिक सफर काफी तेजी से आगे बढ़ा। संदेशखाली की गृहिणी रहीं पात्रा तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस के मजबूत नेता शेख शाहजहां और उनके सहयोगियों के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रमुख चेहरों में शामिल हुईं।
भाजपा ने उन्हें महिलाओं के प्रतिरोध के जमीनी प्रतीक के तौर पर पेश किया। रैलियों के दौरान अपनी छोटी बेटी को गोद में लेकर चलने वालीं रेखा पात्रा संदेशखाली आंदोलन के पहचाने जाने वाले चेहरों में शामिल हो गईं। 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले यह आंदोलन पश्चिम बंगाल में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना था।
इसके बाद भाजपा ने 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें बशीरहाट सीट से उम्मीदवार बनाया, लेकिन वह चुनाव हार गईं। इसके बाद पार्टी ने 2026 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हिंगलगंज सीट से मौका दिया। यहां उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के आनंद सरकार को 5,421 वोटों से हराया।
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