‘भारतीय क्रिकेटर्स गन्ना नहीं हैं’, गावस्कर ने BCCI-ICC को लगाई फटकार

HIGHLIGHTS
- गावस्कर ने खिलाड़ियों के पर्याप्त आराम और वर्कलोड मैनेजमेंट पर जोर दिया।
- बीसीसीआई अपने फ्यूचर टूर प्रोग्राम में बदलाव पर विचार कर चुका है।
- गावस्कर ने कहा कि घरेलू क्रिकेट को प्राथमिकता दिए बिना वर्ल्ड क्लास खिलाड़ी तैयार करना मुश्किल होगा।
नई दिल्ली। पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर चाहते हैं कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) यह समझें कि भारतीय क्रिकेटर्स कोई गन्ना नहीं हैं, जिन्हें पूरी तरह निचोड़ लिया जाए। गावस्कर ने बीसीसीआई और आईसीसी से क्रिकेट के व्यस्त अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर को आसान बनाने की अपील की है।
गावस्कर का मानना है कि लगातार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट होने की वजह से घरेलू क्रिकेट पीछे छूट गया है। इससे भारत की प्रतिभाओं को सामने आने का मौका नहीं मिल पा रहा है। बीसीसीआई ने अपनी पिछली बैठक में फैसला लिया था कि भारत के फ्यूचर टूर प्रोग्राम (FTP) में बदलाव किया जाएगा, ताकि खिलाड़ी सेना देशों में होने वाली सीरीज के लिए बेहतर तैयारी कर सकें।
कार्यभार और चोटों ने बढ़ाई चिंता
बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने कहा था कि बोर्ड का ध्यान खिलाड़ियों को पर्याप्त आराम देने पर रहेगा। इससे उन्हें दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में होने वाली महत्वपूर्ण सीरीज से पहले परिस्थितियों के अनुकूल ढलने और अभ्यास मैचों के लिए समय मिल सकेगा।
यह फैसला खिलाड़ियों के कार्यभार प्रबंधन और चोटों को लेकर बढ़ती चिंता के कारण लिया गया था। बीसीसीआई इस महीने होने वाली आईसीसी बैठक में भी इस मुद्दे को उठा सकता है। गावस्कर ने स्पोर्ट्सस्टार के लिए लिखे अपने कॉलम में कहा, "हाल ही की बैठक में भारतीय क्रिकेट ने मामले पर पकड़ बनाने का प्रयास किया।"
गावस्कर ने क्या कहा?
उन्होंने लिखा, "उम्मीद है जब आईसीसी की बैठक में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कैलेंडर की बात होगी तो फैसला लेने वालों को एहसास होगा कि भारतीय क्रिकेटर्स न तो मशीन हैं और न ही गन्ना, जिनकी आखिरी बूंद तक निचोड़ ली जाए। दुनिया में कहने के लिए अच्छा है कि भारत की बेंच स्ट्रेंथ इतनी मजबूत है कि तीन टीमें उतर सकती हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि नतीजों ने दिखाया कि भारत की एक टीम जीत के लिए संघर्ष कर रही है।"
पूर्व भारतीय कप्तान ने आगे लिखा, "हां, एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने से टीम दोबारा एकजुट होगी और खिलाड़ियों का आगामी सीरीज के लिए विश्वास बढ़ेगा, लेकिन अगर घरेलू क्रिकेट को प्राथमिकता नहीं दी गई तो देश वर्ल्ड क्लास खिलाड़ी नहीं दे पाएगा।"
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