वकीलों से धक्का-मुक्की का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, SCBA ने मांगी जवाबदेही

HIGHLIGHTS
- घटना से जुड़े CCTV फुटेज, बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग और हिरासत के दस्तावेज सुरक्षित रखने की अपील की गई।
- अदालतों, वकीलों के चैंबर और प्रभावित रिहायशी इलाकों तक पहुंच आसान बनाने की मांग उठाई गई।
- एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि वह हड़ताल या अदालतों के बहिष्कार के पक्ष में नहीं है।
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के आसपास वकीलों के साथ कथित धक्का-मुक्की और उन्हें हिरासत में लिए जाने का मामला अब शीर्ष अदालत पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने 10 अक्टूबर 2026 को हुई घटना के संबंध में संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दाखिल की है। एसोसिएशन ने पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही तय करने, हिरासत के कारणों की जानकारी देने और वकीलों तथा आम लोगों की अदालतों तक पहुंच सुनिश्चित करने की मांग की है। याचिका में इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने, सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन बंद करने और सड़कों पर बैरिकेडिंग लगाने का मुद्दा भी उठाया गया है।
वकीलों को जबरन पुलिस वाहनों में बैठाने का आरोप
SCBA के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के पास पुलिस ने कई वकीलों के साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की की और उन्हें जबरन पुलिस वाहनों में बैठाकर ले गई। हिरासत में लिए गए लोगों में वरिष्ठ अधिवक्ता, महिला वकील और बुजुर्ग भी शामिल थे। याचिका में दावा किया गया है कि कई वकीलों को हिरासत में लेने का कारण तक नहीं बताया गया।
एसोसिएशन को इस घटना से जुड़े वीडियो मिले थे। याचिका के मुताबिक, एसोसिएशन के हस्तक्षेप के बाद हिरासत में लिए गए वकीलों को रिहा कर दिया गया।
पुलिस कार्रवाई का पूरा ब्योरा मांगने की अपील
SCBA ने सुप्रीम कोर्ट से पुलिस को विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश देने की मांग की है। एसोसिएशन ने रिपोर्ट में हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या, हिरासत का कानूनी आधार और उसकी अवधि, कार्रवाई में शामिल अधिकारियों की पहचान, बल प्रयोग और पुलिस अधिकारियों को दिए गए निर्देशों की जानकारी शामिल करने की मांग की है।
एसोसिएशन यह भी स्पष्ट कराना चाहती है कि पुलिस कार्रवाई किसके आदेश पर की गई और इसके लिए कौन जिम्मेदार था।
धारा 163 के तहत लगाए गए प्रतिबंधों पर सवाल
याचिका में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 163 के तहत लगाए गए प्रतिबंधों को भी चुनौती दी गई है। SCBA का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट और आसपास की अन्य अदालतों तक जाने वाली सड़कों पर बैरिकेडिंग के कारण वकीलों और मुकदमों से जुड़े लोगों को परेशानी हो रही है।
एसोसिएशन ने संबंधित आदेश की पूरी प्रति अदालत में पेश करने की मांग की है। इसके साथ ही प्रतिबंध लगाने के कारणों, उनके लागू होने वाले क्षेत्र, अवधि और शर्तों का विवरण भी मांगा गया है। याचिका में प्रतिबंधों की आवश्यकता और उनके दायरे की समीक्षा करने की अपील की गई है।
इंटरनेट सेवाएं बंद करने और मेट्रो स्टेशन पर रोक को लेकर आपत्ति
SCBA ने इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने और सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन को बंद करने पर भी चिंता जताई है। याचिका में दावा किया गया है कि ये कदम भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श किए बिना उठाए गए।
एसोसिएशन का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर ऐसे प्रतिबंध नहीं लगाए जाने चाहिए, जिनसे अदालतों का कामकाज प्रभावित हो या लोगों की आवाजाही में बाधा आए।
CCTV फुटेज सुरक्षित रखने और अदालतों तक पहुंच बहाल करने की मांग
SCBA ने घटना से संबंधित CCTV फुटेज, उपलब्ध बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग, हिरासत से जुड़े दस्तावेज, पुलिस के आदेश और वीडियो सुरक्षित रखने की मांग की है। एसोसिएशन चाहती है कि अदालत के निर्देश पर ये सभी रिकॉर्ड पेश किए जाएं, ताकि घटना से जुड़े तथ्य सामने आ सकें।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली हाई कोर्ट, पटियाला हाउस कोर्ट और राउज एवेन्यू कोर्ट तक पहुंच आसान बनाने के लिए उचित रास्ते तय करने और स्पष्ट निर्देश जारी करने की मांग भी की गई है।
इसके अलावा, वकीलों के चैंबर और प्रभावित रिहायशी इलाकों तक पहुंच सुनिश्चित करने की अपील की गई है। एसोसिएशन ने उन वकीलों के लिए भी राहत की मांग की है, जो प्रतिबंधों के कारण अदालतों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
वकीलों की हड़ताल के समर्थन में नहीं है SCBA
याचिका में स्पष्ट किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन वकीलों की हड़ताल, अदालतों के बहिष्कार या कामकाज से दूर रहने का समर्थन नहीं करता। एसोसिएशन की मांग है कि वकीलों को बिना अनुचित बाधा के अपना पेशेवर काम करने दिया जाए।
याचिका का मसौदा अधिवक्ता रीपक कंसल ने तैयार किया है, जबकि इसे एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड प्रज्ञा बागेल ने दाखिल किया है।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.




















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.