दिवाली-धनतेरस से पहले सोने-चांदी के भाव धड़ाम, एक घंटे में 4,400 रुपये से ज्यादा की गिरावट

HIGHLIGHTS
- दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी गिरकर 1,79,200 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई।
- अमेरिका में 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड 5 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गई है।
- डॉलर की मजबूती और ऊंची ब्याज दरों ने कीमती धातुओं पर दबाव बनाया है।
दिवाली और धनतेरस से ठीक पहले सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। त्योहारों के दौरान खरीदारी की तैयारी कर रहे लोगों के लिए राहत की खबर है। सर्राफा और कमोडिटी बाजार खुलते ही दोनों कीमती धातुओं के भाव में तेज गिरावट दर्ज की गई।
बाजार खुलने के करीब एक घंटे के अंदर ही सोने-चांदी की कीमतें 4,400 रुपये से अधिक तक लुढ़क गईं। ऐसे में लंबे समय से कीमतों में कमी का इंतजार कर रहे निवेशकों और खरीदारों के लिए इसे खरीदारी का अच्छा मौका माना जा रहा है।
MCX पर मंगलवार को सोने और चांदी के नए भाव क्या रहे?
मंगलवार सुबह मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) में कारोबार शुरू होते ही भारी बिकवाली देखने को मिली। सुबह करीब 10 बजे दिसंबर डिलीवरी वाला सोना 1,386 रुपये की गिरावट के साथ 1,38,875 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था।
दूसरी ओर, चांदी के वायदा भाव में और बड़ी गिरावट दर्ज की गई। दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी 2 प्रतिशत से ज्यादा टूटकर 4,429 रुपये नीचे आ गई और 1,79,200 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गई।
सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट के पांच प्रमुख कारण
कमोडिटी विशेषज्ञों और बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, वैश्विक और घरेलू बाजार में कई ऐसे कारण रहे, जिनकी वजह से कीमती धातुओं की कीमतों पर दबाव बना है।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी: अमेरिका में 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 5 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गई है। बॉन्ड में गारंटीड रिटर्न मिलता है, जबकि सोने और चांदी से नियमित ब्याज नहीं मिलता। ऐसे में निवेशकों ने कीमती धातुओं से पैसा निकालकर बॉन्ड में लगाना शुरू कर दिया है।
ऊंची ब्याज दरों का असर: अमेरिका में महंगाई, ईंधन की बढ़ती कीमतों और मध्य-पूर्व में ईरान से जुड़े तनाव के कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व लंबे समय तक ब्याज दरें ऊंची रख सकता है। इसका असर सर्राफा बाजार पर भी पड़ रहा है।
डॉलर का मजबूत होना: अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर की मजबूती से दूसरे देशों के खरीदारों के लिए डॉलर में कीमत वाला सोना महंगा हो जाता है। इससे वैश्विक स्तर पर इसकी मांग प्रभावित हुई है।
शेयर बाजार में बिकवाली: इक्विटी बाजारों, खासकर टेक्नोलॉजी और एआई कंपनियों के शेयरों में नुकसान की भरपाई करने और नकदी जुटाने के लिए निवेशकों ने सोने-चांदी में मुनाफावसूली की।
रिकॉर्ड तेजी के बाद मुनाफावसूली: इस साल जनवरी में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव 5,595 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर को पार कर गया था। इसके बाद बड़े फंड और निवेशक लगातार मुनाफा निकाल रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार और अमेरिकी रुख से क्या मिल रहे हैं संकेत?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में पिछले एक सप्ताह के दौरान सोने की कीमतों में करीब 3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इसके चलते सोना लगभग एक साल के निचले स्तर के करीब पहुंच गया है।
एलकेपी सिक्योरिटीज के कमोडिटी एंड करेंसी रिसर्च एनालिस्ट (वाइस प्रेसिडेंट) जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, घरेलू बाजार में सोना करीब 1,38,300 रुपये और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स गोल्ड लगभग 3,900 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है।
उनका कहना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और ब्याज दरों में कटौती को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होने तक कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
आगे कैसी रह सकती है सोने की कीमतों की चाल, क्या खरीदारी का सही समय है?
बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले कुछ दिनों में घरेलू बाजार में सोने की कीमत 1,36,500 रुपये से 1,41,000 रुपये के दायरे में रह सकती है।
अमेरिका की सख्त मौद्रिक नीति के कारण फिलहाल अल्पकालिक तेजी की संभावना कुछ कम दिखाई दे रही है। हालांकि, धनतेरस और दिवाली की खरीदारी करने वाले ग्राहकों के लिए कीमतों में आई यह गिरावट अच्छा अवसर बन सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, लंबी अवधि के निवेश के लिहाज से पोर्टफोलियो में सोने की उपयोगिता और सुरक्षा देने वाली भूमिका अब भी बरकरार है।
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