‘माओवाद से जुड़े हर निशान को मिटाना होगा’, अमित शाह ने दोहराया नक्सलवाद खत्म करने का संकल्प

HIGHLIGHTS
- सेवा संकल्प अभियान के तहत दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग उपलब्ध कराए गए।
- बस्तर के 200 से अधिक पूर्ववर्ती सुरक्षा शिविरों को सेवा डेरों में बदला जा रहा है।
- नियद नेल्लानार योजना के जरिए बस्तर में बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने का दावा किया गया।
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरकार प्रमुख के रूप में कार्यकाल पूरा होने के अवसर पर चलाए जा रहे सेवा संकल्प अभियान के तहत केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कृत्रिम अंग प्राप्त करने वाले दिव्यांगजनों को संबोधित किया। इनमें बड़ी संख्या में नक्सली हिंसा के पीड़ित शामिल हैं।
अमित शाह ने कहा कि इनमें अकेले बस्तर के 1,570 से अधिक लाभार्थी हैं, जो क्षेत्र में माओवाद से हुई पीड़ा को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि माओवाद मुक्त भारत बनने के बाद अब उसके कारण मिले घावों पर मरहम लगाने का समय है, ताकि प्रत्येक पीड़ित सम्मान के साथ जीवन बिता सके। उन्होंने माओवाद के खात्मे के बाद उसकी हर निशानी मिटाने का आह्वान भी किया।
आईईडी धमाकों से निर्दोष लोगों को बनाया दिव्यांग: शाह
माओवादियों की हिंसा का जिक्र करते हुए अमित शाह ने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक उद्देश्य हासिल करने के लिए आईईडी धमाकों के जरिए निर्दोष लोगों को दिव्यांग बनाया। उन्होंने इसे मानवाधिकारों का सबसे बड़ा उल्लंघन बताया।
शाह ने कहा कि मोदी सरकार प्रत्येक दिव्यांग और पीड़ित को पुनर्वास का अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है। इस प्रयास में केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ सरकार के साथ मजबूती से खड़ी है, ताकि हिंसा से प्रभावित लोगों को सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिल सके।
बस्तर में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर जोर
अमित शाह ने कहा कि माओवाद के खात्मे के बाद उसकी निशानियों को मिटाने के प्रयास शुरू हो गए हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टी के शासन के दौरान पांच दशकों तक बस्तर में बुनियादी सुविधाएं भी नहीं पहुंच सकीं, जबकि अब नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से क्षेत्र में आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि बस्तर को फिर से हंसता-खेलता क्षेत्र बनाने के लिए बस्तर ओलंपिक, बस्तर पंडुम, नियद नेल्लानार और मुख्यमंत्री सामूहिक बस योजना के माध्यम से प्रयास किए जा रहे हैं।
शाह के मुताबिक, जिस बस्तर में पहले गोलियों और बम धमाकों की आवाज सुनाई देती थी और भय का माहौल रहता था, वहां आज हजारों युवा खेलों में भाग ले रहे हैं और अपनी परंपराओं को जीवित रख रहे हैं।
बस्तर पंडुम से जनजातीय कला और संस्कृति को बढ़ावा
अमित शाह ने बस्तर पंडुम का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से जनजातीय कला और संस्कृति को पुनर्जीवित करने का बड़ा प्रयास किया गया है।
उन्होंने बताया कि 500 से अधिक पूर्ववर्ती सुरक्षा शिविरों में से 200 से ज्यादा को शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा में बदला जा रहा है। शाह ने कहा कि जिन शिविरों में पहले जवान लोगों की सुरक्षा के लिए तैनात रहते थे, अब उन्हीं स्थानों पर विकसित बस्तर की नींव रखी जा रही है।
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