फेसबुक पर हुई दोस्ती, वियतनाम से हिमाचल पहुंची दुल्हन; रजत संग लिए सात फेरे

HIGHLIGHTS
- हिमाचल के कांगड़ा निवासी रजत ने वियतनाम की एचजिमवाया से हिंदू रीति-रिवाजों के साथ शादी की।
- दोनों की प्रेम कहानी फेसबुक से शुरू हुई थी, जो दोस्ती के बाद शादी के रिश्ते में बदल गई।
- अलग भाषा और संस्कृति के बावजूद परिवारों की सहमति से मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच विवाह संपन्न हुआ।
कांगड़ा। कहते हैं कि सच्चे रिश्ते दूरी और सीमाओं के मोहताज नहीं होते। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले की अमलेला पंचायत के रहने वाले रजत और वियतनाम की एचजिमवाया की प्रेम कहानी भी कुछ ऐसी ही है। दोनों की मुलाकात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक के जरिए हुई थी, जो धीरे-धीरे दोस्ती से आगे बढ़कर जीवनभर के साथ में बदल गई।
हजारों किलोमीटर की दूरी, अलग-अलग भाषा और संस्कृति के बावजूद दोनों ने एक-दूसरे को अपना जीवनसाथी बनाने का फैसला किया। परिवारों की सहमति के बाद एचजिमवाया वियतनाम से भारत पहुंचीं। रजत उन्हें लेने दिल्ली पहुंचे, जहां से दोनों कांगड़ा के फतेहपुर स्थित श्री नृसिंह मंदिर, ठाकरां पहुंचे।
मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चारण और हिंदू रीति-रिवाज के साथ दोनों का विवाह संपन्न हुआ। परिजनों और रिश्तेदारों की मौजूदगी में रजत और एचजिमवाया ने सात फेरे लेकर नए जीवन की शुरुआत की।
प्यार के आगे भाषा और संस्कृति की दूरी भी हुई कम
रजत ने बताया कि उनके रिश्ते में भाषा कभी रुकावट नहीं बनी। उनका कहना है कि आपसी समझ और प्रेम ही सबसे बड़ी भाषा है। समय के साथ दोनों एक-दूसरे की भाषा और परंपराओं को और बेहतर तरीके से समझने का प्रयास करेंगे।
वहीं, एचजिमवाया ने भारतीय परंपरा के अनुसार हुए विवाह को अपने लिए खास और यादगार अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि हिमाचल पहुंचने के बाद उन्हें परिवार का प्यार और अपनापन मिला, जिससे उनकी नई जिंदगी की शुरुआत और भी सुखद बन गई।
परिवार ने दिया नवदंपती को आशीर्वाद
विवाह समारोह में रजत के पिता सरताज सिंह समेत परिवार के अन्य सदस्य मौजूद रहे। सभी ने नवविवाहित जोड़े को सुखी और खुशहाल जीवन की शुभकामनाएं दीं।
पंडित योगराज शर्मा ने वैदिक विधि-विधान के साथ विवाह संस्कार संपन्न कराया। रजत और एचजिमवाया की यह कहानी एक बार फिर साबित करती है कि मजबूत रिश्तों के सामने न देशों की सीमाएं मायने रखती हैं और न ही भाषा व संस्कृति का अंतर।
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