भारतीय संस्कृति की वैश्विक पहचान बढ़ी, प्राचीन धरोहरों की वापसी में तेजी: पीएम मोदी

HIGHLIGHTS
- पीएम मोदी ने भारतीय संस्कृति की बढ़ती वैश्विक पहचान का उल्लेख किया।
- संगीत, नृत्य, सिनेमा और खानपान भारत से दुनिया का जुड़ाव बढ़ा रहे हैं।
- ज्ञान भारतम पहल के जरिए प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण पर जोर दिया जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत की सांस्कृतिक विरासत को दुनियाभर में लगातार पहचान मिल रही है। भारतीय संगीत, नृत्य, सिनेमा और खानपान के जरिए विभिन्न देशों के लोग भारत से जुड़ रहे हैं। प्रधानमंत्री ने ये बातें ‘बृहत्तर भारत: दुनिया भर में भारत के सांस्कृतिक संबंध’ विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के लिए भेजे गए अपने लिखित संदेश में कहीं।
सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए सरकार के प्रयास
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि भारत सरकार ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण के साथ-साथ देश की प्राचीन पांडुलिपियों को सहेजने पर भी काम कर रही है। इसके लिए ज्ञान भारतम पहल के माध्यम से प्रयास किए जा रहे हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य भारत की पांडुलिपियों से जुड़ी विरासत को संरक्षित करना है।
उन्होंने यह भी कहा कि विदेशों में मौजूद भारत की प्राचीन धरोहरों को वापस लाने के प्रयासों में नई तेजी आई है।
सरकार की ओर से सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने के लिए किए जा रहे प्रमुख प्रयास इस प्रकार हैं:
ऐतिहासिक स्मारकों को सुरक्षित रखने के साथ प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण पर ध्यान दिया जा रहा है।
ज्ञान भारतम पहल के जरिए पांडुलिपियों से जुड़ी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का काम किया जा रहा है।
दूसरे देशों में मौजूद भारत की प्राचीन धरोहरों को वापस लाने के प्रयासों को गति दी गई है।
नई दिल्ली में 14 से 16 अक्तूबर तक आयोजित हो रहा सम्मेलन
‘बृहत्तर भारत: दुनिया भर में भारत के सांस्कृतिक संबंध’ विषय पर यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन नई दिल्ली के विज्ञान भवन में 14 से 16 अक्तूबर तक आयोजित किया जा रहा है। इसका आयोजन संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) कर रहा है।
सम्मेलन में भारत की सांस्कृतिक विरासत और अन्य समाजों तथा सभ्यताओं के साथ देश के संबंधों पर चर्चा की जा रही है। इसके उद्घाटन सत्र में केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत भी उपस्थित रहे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से भेजे गए लिखित संदेश को केंद्रीय संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल ने पढ़कर सुनाया।
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