उत्तर भारतीय होने पर फरार होने की आशंका नहीं जता सकती पुलिस, मद्रास हाईकोर्ट की फटकार

HIGHLIGHTS
- मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु पुलिस की जमानत विरोधी दलील खारिज की।
- कोर्ट ने कहा कि मूल निवास स्थान फरार होने की आशंका का आधार नहीं हो सकता।
- आरोपी अंकुर कुमार जानी को शर्तों के साथ जमानत दी गई।
चेन्नई। मद्रास हाईकोर्ट ने धोखाधड़ी के एक मामले में तमिलनाडु पुलिस के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने पुलिस की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें आरोपी को इस आधार पर जमानत देने का विरोध किया गया था कि वह उत्तर भारतीय है और उसके राज्य से फरार होने की आशंका है।
मामले की सुनवाई के दौरान मंगलवार को जस्टिस एन. रमेश ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति के मूल निवास स्थान को उसके फरार होने की आशंका का आधार नहीं बनाया जा सकता।
कोर्ट ने आरोपी को दी जमानत
हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस अधिकारी की ओर से दाखिल हलफनामे में इस तरह की बातें नहीं होनी चाहिए। इसके बाद कोर्ट ने आरोपी अंकुर कुमार जानी को कुछ शर्तों के साथ जमानत दे दी। साथ ही, जरूरत पड़ने पर उन्हें जांच अधिकारी के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला FIITJEE लिमिटेड और कोयंबटूर के सुगुना पीआईपी स्कूल के बीच छात्रों को जेईई (JEE) और नीट (NEET) परीक्षाओं की कोचिंग देने के लिए हुए समझौते से जुड़ा है। कोर्स की शर्तों के अनुसार, प्रत्येक छात्र के अभिभावक को एक लाख रुपये का रिफंडेबल कॉशन डिपॉजिट जमा करना था। आरोप है कि वादा किए जाने के बावजूद संस्थानों ने यह रकम वापस नहीं की।
एक अभिभावक की शिकायत के बाद FIITJEE के दिनेश कुमार गोयल और स्कूल के लक्ष्मी नारायणसामी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। पुलिस के अनुसार, जमानत की अर्जी देने वाले अंकुर कुमार जानी का नाम शुरुआती शिकायत या एफआईआर में शामिल नहीं था।
आरोपी पर क्या हैं आरोप?
पुलिस ने अंकुर कुमार जानी को इस मामले में इसलिए आरोपी बनाया क्योंकि उन्होंने 26 फरवरी 2011 को FIITJEE की ओर से स्कूल के साथ हुए समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
पुलिस का आरोप है कि आरोपियों ने 262 अभिभावकों से मिलकर करीब 2.62 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की। मामले में मुख्य आरोपी फरार बताया जा रहा है, जबकि एक अन्य आरोपी को अग्रिम जमानत मिल चुकी है।
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