रबी सीजन से पहले यूरिया को लेकर राहत, अगस्त के मुकाबले 10% तक सस्ती कीमत

HIGHLIGHTS
- अगस्त के मुकाबले भारत को करीब 10 प्रतिशत सस्ती दर पर यूरिया मिल रहा है।
- आईपीएल के 17 लाख टन के टेंडर पर कंपनियों ने 53.5 लाख टन यूरिया की पेशकश की।
- किसानों को 45 किलोग्राम यूरिया का बैग 242 रुपये में मिलता है।
नई दिल्ली। रबी फसलों की बुवाई से पहले किसानों के लिए राहत की खबर है। देश में यूरिया की कमी होने की आशंका नहीं है। करीब एक महीने पहले ब्राजील और मध्य पूर्व में यूरिया की कीमतों में तेजी के संकेत मिले थे, लेकिन वैश्विक स्तर पर आपूर्ति बढ़ने के बाद कीमतों में नरमी आई है। अगस्त की तुलना में भारत को अब करीब 10 प्रतिशत कम कीमत पर यूरिया मिल रहा है।
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अनुसार, भारत में हर साल लगभग 400 लाख टन यूरिया की जरूरत होती है। इसमें से करीब 100 लाख टन का आयात करना पड़ता है।
यूरिया की कीमतों में 10 प्रतिशत तक गिरावट
वित्त वर्ष 2025-26 में अप्रैल से जनवरी के बीच देश में 251.26 लाख टन यूरिया का उत्पादन हुआ। इसी अवधि में 89.30 लाख टन यूरिया का आयात किया गया। ये आंकड़े देश की यूरिया संबंधी जरूरतों को पूरा करने में आयात की भूमिका को दर्शाते हैं।
रबी फसलों की बुवाई से पहले सरकारी कंपनी इंडियन पोटाश लिमिटेड (आईपीएल) ने 17 लाख टन यूरिया आयात करने के लिए टेंडर जारी किया था। इसके तहत पश्चिमी तट के लिए 10 लाख टन और पूर्वी तट के लिए सात लाख टन यूरिया खरीदा जाना है।
टेंडर में पूर्वी तट के लिए सबसे कम बोली 352.10 डॉलर प्रति टन और पश्चिमी तट के लिए 356.25 डॉलर प्रति टन रही। इससे पहले अगस्त में जारी टेंडर में शुरुआती कीमतें करीब 390 से 394 डॉलर प्रति टन थीं। इस तरह ताजा टेंडर में यूरिया की कीमतें लगभग 10 प्रतिशत कम हैं।
उर्वरक सब्सिडी के खर्च में मिलेगी राहत
वैश्विक बाजार में कीमतों में गिरावट से भारतीय खरीदारों के लिए प्रतिस्पर्धी दरों पर यूरिया खरीदने के अवसर बढ़े हैं। आईपीएल की ओर से 17 लाख टन यूरिया के आयात के लिए जारी टेंडर के मुकाबले विभिन्न कंपनियों ने करीब 53.5 लाख टन यूरिया की पेशकश की है।
यह निर्धारित जरूरत से तीन गुना से भी अधिक है। इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक निर्यातकों के बीच भारतीय बाजार में यूरिया बेचने को लेकर प्रतिस्पर्धा बनी हुई है।
हालांकि, आयात की कीमत कम होने का सीधा फायदा किसानों को नहीं मिलेगा, क्योंकि यूरिया के बैग की कीमत सरकार तय करती है। इसका प्रमुख लाभ सरकार को उर्वरक सब्सिडी पर होने वाले खर्च में कमी के रूप में मिल सकता है।
अप्रैल में 959 डॉलर प्रति टन के पार पहुंची थी कीमत
किसानों को 45 किलोग्राम यूरिया का बैग 242 रुपये में मिलता है। इसकी लागत और किसानों से प्राप्त होने वाली रकम के बीच का अंतर सरकार सब्सिडी के रूप में वहन करती है।
खाड़ी संकट और आपूर्ति में बाधाओं के चलते इस साल वैश्विक उर्वरक बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। अप्रैल में यूरिया की कीमतें 959 डॉलर प्रति टन के पार पहुंच गई थीं। इसी दौरान चीन की निर्यात नीति में बदलाव से अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति का दबाव कुछ कम हुआ।
चीन अपनी घरेलू जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यूरिया के निर्यात पर समय-समय पर सख्ती करता है और नियंत्रित तरीके से इसमें ढील भी देता है। इस बार निर्यात में दी गई छूट से अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की उपलब्धता बढ़ी और कीमतों में गिरावट आने में मदद मिली।
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