सोनिया गांधी के मतदाता सूची मामले में सुनवाई टली, 6 नवंबर को होगी अगली सुनवाई

HIGHLIGHTS
- शिकायतकर्ता और वकील विकास त्रिपाठी ने मजिस्ट्रेट अदालत के फैसले को सत्र न्यायालय में चुनौती दी थी।
- 21 सितंबर को विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने पुनरीक्षण याचिका स्वीकार कर पुराना आदेश रद्द कर दिया था।
- मामले की सुनवाई अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विनोद जोशी की अदालत में होगी।
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में बुधवार को सोनिया गांधी का नाम मतदाता सूची में शामिल किए जाने से जुड़े मामले पर सुनवाई नहीं हो सकी। वकीलों की हड़ताल के कारण अदालत ने सुनवाई स्थगित कर दी। यह शिकायत वर्ष 1980 में सोनिया गांधी का नाम मतदाता सूची में दर्ज किए जाने को लेकर है, जबकि उन्हें भारतीय नागरिकता अप्रैल 1983 में मिली थी। मामले की अगली सुनवाई अब 6 नवंबर को होगी।
सत्र न्यायालय ने निरस्त किया मजिस्ट्रेट अदालत का आदेश
इस मामले में मजिस्ट्रेट अदालत ने पहले सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश देने से इनकार कर दिया था। शिकायतकर्ता और वकील विकास त्रिपाठी ने इस फैसले को सत्र न्यायालय में चुनौती दी थी। 21 सितंबर को विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने उनकी पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए मजिस्ट्रेट अदालत का आदेश रद्द कर दिया। इसके बाद मामले को नए सिरे से सुनवाई के लिए मजिस्ट्रेट अदालत में भेज दिया गया।
मजिस्ट्रेट अदालत में दोबारा होगी सुनवाई
एमपी-एमएलए मामलों की सुनवाई करने वाले अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विनोद जोशी की अदालत अब इस मामले पर नए सिरे से विचार करेगी। इस दौरान संबंधित पुलिस अधिकारी से स्टेटस रिपोर्ट मांगी जाएगी। उनका पक्ष सुनने के बाद अदालत विस्तृत आदेश जारी करेगी।
सत्र न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वह मजिस्ट्रेट अदालत की जगह लेकर शिकायत पर अंतिम निर्णय नहीं दे सकती। इसी वजह से मामले को वापस मजिस्ट्रेट अदालत में भेजना आवश्यक था।
शिकायत खारिज करने के फैसले पर सत्र न्यायालय की आपत्ति
सत्र न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि मजिस्ट्रेट अदालत ने शिकायत खारिज करते समय पर्याप्त कारण नहीं बताए थे। शिकायत के साथ ऐसे दस्तावेज की फोटोकॉपी पेश की गई थी, जिसकी प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं हुई थी। हालांकि, अदालत का कहना था कि केवल इस आधार पर शिकायत खारिज करने के फैसले को उचित तरीके से स्पष्ट नहीं किया गया।
आदेश में यह भी नहीं बताया गया था कि शिकायत में लगाए गए आरोपों से कोई संज्ञेय अपराध बनता है या नहीं।
नागरिकता और सरकारी संस्थाओं के अधिकार क्षेत्र पर भी सवाल
सत्र न्यायालय ने मजिस्ट्रेट अदालत के पुराने आदेश में नागरिकता और संबंधित सरकारी संस्थाओं के अधिकार क्षेत्र को लेकर की गई टिप्पणियों पर भी सवाल उठाए। विशेष न्यायाधीश ने कहा कि केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की भूमिका के संबंध में की गई टिप्पणियां उचित नहीं थीं।
अदालत के मुताबिक, पुराने आदेश में यह भी स्पष्ट नहीं किया गया था कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कराना जरूरी है या नहीं।
1980 में मतदाता सूची में नाम दर्ज होने का आरोप
शिकायतकर्ता विकास त्रिपाठी का आरोप है कि सोनिया गांधी का नाम भारतीय नागरिकता मिलने से पहले ही मतदाता सूची में शामिल कर लिया गया था। शिकायत के अनुसार, उनका नाम 1980 में मतदाता सूची में दर्ज हुआ था, 1982 में हटा दिया गया और 1983 में फिर से शामिल किया गया।
शिकायतकर्ता की ओर से पेश दस्तावेजों में सफदरजंग रोड, नई दिल्ली का पता भी दर्ज होने की बात कही गई है।
पुलिस की स्टेटस रिपोर्ट के बाद आगे बढ़ेगी कार्रवाई
सत्र न्यायालय ने यह भी कहा कि मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए भारतीय नागरिक होना जरूरी है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
अब मजिस्ट्रेट अदालत पुलिस की स्टेटस रिपोर्ट और संबंधित पक्षों का पक्ष सुनने के बाद तय करेगी कि शिकायत पर आगे क्या कार्रवाई की जाए। फिलहाल, अदालत ने मामले में कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।
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