यूपी: ग्राम प्रधानों की जगह प्रशासक नियुक्ति पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब

HIGHLIGHTS
- ग्राम प्रधानों की जगह प्रशासक नियुक्त करने के यूपी सरकार के आदेश पर हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा।
- लखनऊ पीठ ने पंचायतीराज विभाग के अपर मुख्य सचिव को 10 जुलाई को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश होने का निर्देश दिया।
- याचिकाकर्ता ने नियुक्ति आदेश को पंचायत राज व्यवस्था और 73वें संविधान संशोधन के खिलाफ बताते हुए चुनौती दी है।
लखनऊ: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने प्रदेश की ग्राम पंचायतों में निर्वाचित ग्राम प्रधानों के स्थान पर प्रशासक नियुक्त करने के राज्य सरकार के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने पंचायतीराज विभाग के अपर मुख्य सचिव को 10 जुलाई को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित होकर मामले में सहयोग करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल की खंडपीठ ने यह आदेश स्थानीय अधिवक्ता संजय कुमार शर्मा की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
याचिकाकर्ता ने अदालत में दलील दी कि 25 मई को जारी किया गया वह आदेश, जिसके तहत ग्राम प्रधानों की जगह प्रशासकों की नियुक्ति की गई है, संविधान के 73वें संशोधन, पंचायत राज व्यवस्था और संबंधित कानूनी प्रावधानों की भावना के खिलाफ है।
याचिका में कहा गया कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को हटाकर प्रशासकों की नियुक्ति से ग्रामीण क्षेत्रों की लोकतांत्रिक व्यवस्था और पंचायतों की स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है। यह मामला केवल ग्राम प्रधानों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण स्वशासन और पंचायती राज संस्थाओं की संवैधानिक भूमिका से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से मुख्य स्थायी अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार सिंह ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि मामले की सुनवाई में सहायता के लिए पंचायतीराज विभाग के अपर मुख्य सचिव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।
अब इस मामले में सरकार के जवाब और विभागीय पक्ष रखने के बाद आगे की सुनवाई होगी।
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