'सरकारी स्कूल में टाट पर बैठकर पढ़ता था, आज मुख्यमंत्री हूं', CM सुक्खू ने बच्चों को सुनाई संघर्ष की कहानी

HIGHLIGHTS
- मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने चंबा के मैहला स्कूल में विद्यार्थियों से संवाद किया।
- CM सुक्खू ने बताया कि वह भी सरकारी स्कूल में टाट पर बैठकर पढ़ाई करते थे।
- उन्होंने बच्चों को बड़े सपने देखने और मेहनत से लक्ष्य हासिल करने की सलाह दी।
चंबा। कभी सरकारी स्कूल में पढ़ाई के दौरान बैठने के लिए टाट का सहारा लेना पड़ता था, लेकिन आज उसी स्कूल के विद्यार्थी के कंधों पर पूरे हिमाचल प्रदेश की जिम्मेदारी है। न तो उन्हें कोई बड़ा पद विरासत में मिला और न ही सफलता का सफर आसान रहा। अपनी मेहनत, हिम्मत और नेतृत्व क्षमता के दम पर एक सरकारी स्कूल का छात्र मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचा।
अपने जीवन के इसी सफर को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शुक्रवार को पीएम श्री आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय मैहला में विद्यार्थियों के साथ साझा किया। उन्होंने बच्चों से बातचीत करते हुए कहा कि सपने पूरे करने के लिए परिस्थितियों से ज्यादा हौसले की जरूरत होती है। सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला विद्यार्थी भी मेहनत और लगन के बल पर प्रदेश का मुख्यमंत्री बन सकता है। इसलिए बच्चों को बड़े लक्ष्य तय करके उन्हें हासिल करने के लिए पूरी ईमानदारी से प्रयास करना चाहिए।
मुख्यमंत्री और विद्यार्थियों के बीच हुआ यह संवाद कई मायनों में खास रहा। बच्चों ने न सिर्फ उनसे अपनी परेशानियां साझा कीं, बल्कि खुलकर सवाल पूछे और भविष्य को लेकर अपने सपनों के बारे में भी बताया।
मुख्यमंत्री ने भी औपचारिकताओं से हटकर बच्चों के बीच समय बिताया। उनके सवालों पर कभी हंसी-मजाक किया तो कभी अपने जीवन के अनुभवों के जरिए उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। मैहला के विद्यार्थियों के लिए यह मुलाकात अपने सपनों को नई दिशा देने का अवसर बनी। उन्हें स्कूल की सुविधाओं को लेकर भरोसा मिला और मुख्यमंत्री के संघर्ष से यह संदेश भी मिला कि मजबूत इरादों के सामने मुश्किल परिस्थितियां बाधा नहीं बन सकतीं।
करीब 40 विद्यार्थियों के बीच पहुंचे मुख्यमंत्री
विद्यालय पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री सीधे करीब 40 विद्यार्थियों के बीच गए। उन्होंने बच्चों से हाथ मिलाया, गले मिले और उनके भविष्य के लक्ष्यों के बारे में पूछा।
इस दौरान 10 विद्यार्थियों ने पुलिस अधिकारी, 15 ने शिक्षक और 10 ने सेना में जाने की इच्छा जताई। वहीं, दो बच्चों ने वकील, एक ने भारतीय प्रशासनिक सेवा का अधिकारी, एक ने कमांडो और एक ने डॉक्टर बनने की बात कही।
मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए बच्चों से पूछा कि क्या कोई नेता नहीं बनना चाहता? इस सवाल पर किसी भी विद्यार्थी ने हाथ नहीं उठाया। इस पर उन्होंने हंसते हुए बताया कि वह खुद भी सरकारी स्कूल में पढ़कर मुख्यमंत्री बने हैं।
बच्चों ने बताईं स्कूल की समस्याएं, मुख्यमंत्री ने घोषित किए दो करोड़ रुपये
विद्यार्थियों के साथ बातचीत में स्कूल की समस्याओं का मुद्दा भी उठा। 12वीं कक्षा की छात्रा सुहानी ने कमरों की कमी की समस्या बताते हुए कहा कि विद्यार्थियों की संख्या के हिसाब से स्कूल में पर्याप्त कमरे उपलब्ध नहीं हैं।
इस पर मुख्यमंत्री ने अपने स्कूल के दिनों को याद किया। उन्होंने बताया कि प्राथमिक कक्षाओं में उन्हें भी टाट पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती थी। उन्होंने कहा कि नए भवन के लिए जमीन उपलब्ध होने और जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने पर जल्द ही दो करोड़ रुपये दिए जाएंगे।
वहीं, पांचवीं कक्षा के छात्र गोविंद ने प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिए बड़े हॉल की जरूरत बताई। मुख्यमंत्री ने स्कूल में बड़ा हॉल बनवाने का आश्वासन दिया।
इसके अलावा 11वीं के छात्र परम चौहान ने बताया कि कई विद्यार्थी तीन से चार किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल पहुंचते हैं। पहले बस की सुविधा मिलती थी, लेकिन अब यह सेवा बंद हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने इस समस्या पर बस सुविधा दोबारा शुरू करवाने का भरोसा दिया।
परीक्षा के तनाव से बचने के लिए अपनों से करें बातचीत
11वीं कक्षा की छात्रा तमत्ना कपूर ने मुख्यमंत्री से परीक्षा के दौरान होने वाले तनाव को दूर करने का तरीका पूछा। इस पर सुक्खू ने सलाह दी कि जब भी तनाव महसूस हो, तो कुछ समय के लिए पढ़ाई से ध्यान हटाकर दोस्तों, सहपाठियों और परिवार के लोगों से बातचीत करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि हंसने-बोलने से तनाव कम करने में मदद मिलती है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को मोबाइल फोन का कम इस्तेमाल करने की सलाह भी दी।
पूरा हिमाचल एक परिवार, आर्थिक संतुलन सबसे बड़ी चुनौती
छठी कक्षा की छात्रा शिवाया ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि प्रदेश का मुखिया बनने के बाद उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या रहती है? इस पर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि पूरे हिमाचल को एक परिवार की तरह देखना और आर्थिक संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है।
'मुख्यमंत्री दूसरों को छुट्टी दे सकता है, खुद नहीं'
विद्यार्थियों के साथ बातचीत के दौरान सातवीं कक्षा के छात्र आयुष ने मुख्यमंत्री से पूछा कि क्या मुख्यमंत्री बनने के बाद रविवार को छुट्टी मिलती है?
इस सवाल पर सुक्खू मुस्कुराए और जवाब दिया, 'मुख्यमंत्री दूसरों को छुट्टी दे सकता है, लेकिन खुद छुट्टी नहीं ले सकता।'
मुख्यमंत्री का जवाब सुनकर बच्चे भी मुस्कुरा उठे। उन्होंने बताया कि आज वह विद्यार्थियों के बीच समय बिता रहे हैं, जबकि अगले दिन उन्हें दूसरे बच्चों और आम लोगों की समस्याएं सुननी होती हैं।
उन्होंने कहा कि लोगों की सेवा करते हुए ही उनका ज्यादातर समय गुजरता है। विद्यार्थियों के साथ यह बातचीत सिर्फ सवाल-जवाब तक सीमित नहीं रही, बल्कि इस दौरान संघर्ष, सफलता, असफलता और जीवन के अनुभवों से जुड़ी कई प्रेरक बातें भी सामने आईं।




























Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.