SIR के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा INDIA गठबंधन, राहुल गांधी-खरगे समेत विपक्ष ने रखीं 10 मांगें

HIGHLIGHTS
- विपक्ष ने चुनाव आयोग से संबंधित दस्तावेज और डेटाबेस का ब्योरा पेश करने की मांग की।
- हटाए गए मतदाताओं की सूची सार्वजनिक करने और स्वतंत्र समिति गठित करने का प्रस्ताव रखा गया।
- याचिका में बिना नोटिस और सुनवाई के मतदाता सूची से नाम हटाने पर रोक लगाने की मांग भी शामिल है।
नई दिल्ली। देश की चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर INDIA गठबंधन ने सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
सोमवार को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत विपक्ष के कई नेता और समर्थक मार्च निकालकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की ओर से कराए जा रहे SIR और चुनाव से जुड़े फैसलों पर तत्काल अंतरिम रोक लगाने की मांग करते हुए शीर्ष अदालत में याचिका दायर की है।
विपक्ष ने यह कदम रविवार को सीजेआई सूर्यकांत की ओर से राहुल गांधी और विपक्षी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करने से इनकार किए जाने के बाद उठाया। उस समय सीजेआई ने कहा था कि मामला अदालत के समक्ष विचाराधीन है। इसके बाद विपक्षी नेताओं ने संयुक्त याचिका दाखिल की।
सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर इस याचिका को 'राहुल गांधी बनाम भारत निर्वाचन आयोग' के नाम से सूचीबद्ध किया गया है।
याचिका दाखिल करने से पहले निकाला मार्च
सोमवार को राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA गठबंधन के नेताओं ने विरोध मार्च निकाला। इसमें प्रियंका गांधी, सपा प्रमुख अखिलेश यादव, टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव समेत कई विपक्षी नेता शामिल हुए।
हालांकि, राहुल गांधी शाम 4:30 बजे की निर्धारित समय-सीमा तक सुप्रीम कोर्ट नहीं पहुंच सके। इसके चलते कांग्रेस की लीगल टीम के वकील एस. प्रसन्ना ने उनसे एक-दो घंटे पहले ही शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल कर दी।
याचिका में विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के साथ राहत के लिए 10 प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें SIR से संबंधित दस्तावेज पेश करने से लेकर सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति गठित करने तक की मांग शामिल है।
SIR से जुड़े सभी दस्तावेज पेश करने की मांग
विपक्ष की ओर से दायर याचिका में मांग की गई है कि चुनाव आयोग को 24 जून 2025 से शुरू हुए SIR से संबंधित सभी फाइलें, समझौते, बैठकों का ब्योरा, आपत्तियों के रिकॉर्ड और ECINET व ERONET के एक्सेस लॉग तथा फाइल नोटिंग्स सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश करने का निर्देश दिया जाए।
SIR के फैसलों की संवैधानिक जांच हो
याचिका में मांग की गई है कि SIR से जुड़े फैसलों की जांच की जाए कि वे संविधान के अनुच्छेद 324, चुनाव आयुक्त अधिनियम 2023 की धारा 18 और टी.एन. शेषन बनाम भारत संघ (1995) मामले में तय मानकों के अनुरूप हैं या नहीं।
यदि ये फैसले बिना कानूनी अधिकार के लिए गए हैं, तो उन्हें रद्द करने की मांग भी की गई है।
दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई
विपक्ष ने मतदाता सूची तैयार करने में संवैधानिक नियमों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 के तहत सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
शिकायतों का जल्द निपटारा किया जाए
याचिका में चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग की गई है कि वह याचिकाकर्ताओं की शिकायतों पर तत्काल उचित फैसला ले। साथ ही, चुनाव आयुक्त अधिनियम 2023 की धारा 18 के अनुसार सभी फैसलों को सही तरीके से दर्ज किया जाए।
ऑनलाइन फॉर्म-6 में बदलाव की मांग
विपक्ष ने ऑनलाइन फॉर्म-6 को 'मतदाता पंजीकरण नियम, 1960' में निर्धारित प्रारूप के अनुरूप बनाने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि उचित कानूनी संशोधन के बिना इसमें कोई बदलाव नहीं किया जाना चाहिए।
सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में बने स्वतंत्र समिति
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की गई है। इसमें तकनीकी विशेषज्ञों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों को शामिल करने का प्रस्ताव है।
यह समिति SIR के दौरान हटाए गए या बदले गए नामों का ऑडिट करे और ECINET व ERONET डेटाबेस की जांच करे। इसके अलावा, ईवीएम (EVM) के इस्तेमाल, डिजाइन, आर्किटेक्चर और प्रोटोकॉल की व्यापक समीक्षा करने तथा वैश्विक सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की मांग भी की गई है।
हटाए गए मतदाताओं का ब्योरा सार्वजनिक हो
विपक्ष ने मांग की है कि SIR के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए सभी लोगों के नाम, नाम हटाने का कारण और लिंग व उम्र के आधार पर उनका वर्गीकरण बूथ-वार सार्वजनिक किया जाए।
इसके साथ ही पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा जोड़ने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने की मांग की गई है।
बिना नोटिस मतदाता सूची से नाम हटाने पर रोक
याचिका में कहा गया है कि किसी भी नागरिक का नाम पूर्व कानूनी नोटिस और सुनवाई का अवसर दिए बिना मतदाता सूची से नहीं हटाया जाना चाहिए।
इसके अलावा, पंजाब और अन्य चुनावी राज्यों में पात्र नागरिकों को कट-ऑफ तारीख तक आवेदन करने की अनुमति देने की मांग भी की गई है।
SIR प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने की मांग
विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि याचिका में उठाए गए गंभीर मुद्दों पर अंतिम फैसला आने तक देशभर में चल रही SIR प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से अंतरिम रोक लगाई जाए।
सुप्रीम कोर्ट से उचित आदेश जारी करने की अपील
याचिका में चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और प्रत्येक नागरिक के मताधिकार की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट से आवश्यक अन्य आदेश जारी करने की भी मांग की गई है।
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