जेडी वेंस की विदेशी कर्मचारियों पर टिप्पणी से भारत असहमत, भारतीय पेशेवरों के योगदान का किया जिक्र

HIGHLIGHTS
- विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत का पक्ष रखा।
- अमेरिकी श्रम विभाग ने कुछ कंपनियों के PERM आवेदनों पर रोक लगाई है।
- संबंधित कंपनियों के पात्र कर्मचारियों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
भारत ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की विदेशी कर्मचारियों को लेकर की गई टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि अमेरिका में काम कर रहे भारतीय पेशेवर उच्च शिक्षित और कुशल हैं। वे अमेरिकी अर्थव्यवस्था के साथ-साथ वहां की नवाचार व्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
जायसवाल ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी श्रम विभाग की ओर से कुछ कंपनियों के स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम (पीईआरएम) के आवेदनों पर रोक लगाने का फैसला एच-1बी वीजा कार्यक्रम से अलग है। इस निर्णय से मौजूदा एच-1बी वीजा की वैधता या वीजा धारकों और उनके आश्रितों की स्थिति पर अपने आप कोई प्रभाव नहीं पड़ता। हालांकि, संबंधित कंपनियों के पात्र कर्मचारियों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
जेडी वेंस की टिप्पणी पर भारत ने जताई आपत्ति
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत को अमेरिकी श्रम विभाग की ओर से कुछ कंपनियों के पीईआरएम आवेदनों पर रोक लगाने के फैसले की जानकारी है। उन्होंने दोहराया कि पीईआरएम और एच-1बी वीजा कार्यक्रम अलग-अलग हैं। पीईआरएम आवेदनों पर रोक लगने से एच-1बी वीजा की वैधता या वीजा धारकों और उनके आश्रितों की स्थिति पर स्वतः असर नहीं पड़ता। हालांकि, संबंधित कंपनियों के पात्र कर्मचारियों की स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर प्रभाव पड़ सकता है।
रणधीर जायसवाल ने कहा कि प्रतिभाओं का आवागमन भारत और अमेरिका, दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए फायदेमंद है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति की टिप्पणियों पर भारत का मानना है कि इस तरह का वर्णन उचित नहीं है। यह इस तथ्य की अनदेखी करता है कि अमेरिका में भारतीय पेशेवर उच्च शिक्षित और कुशल हैं तथा वहां की अर्थव्यवस्था और नवाचार व्यवस्था में योगदान दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अमेरिका का इतिहास भी प्रवासियों की कई पीढ़ियों से आकार लेता रहा है। उनके श्रम, उद्यम और नवाचार ने देश की वृद्धि और समृद्धि में अहम भूमिका निभाई है।
समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा पर 25 देशों ने की चर्चा
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत और लाइबेरिया समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए गठित ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स’ का संयुक्त रूप से समन्वय कर रहे हैं। इस समूह की पहली बैठक न्यूयॉर्क में हुई थी, जिसकी सह-अध्यक्षता भारत और लाइबेरिया के विदेश मंत्रियों ने की थी।
जायसवाल ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र और काला सागर क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों पर हाल में हुए कई हमलों की भारत ने कड़ी निंदा की है। इस मुद्दे पर हुई हालिया बैठक में करीब 25 देशों ने हिस्सा लिया। ये देश वाणिज्यिक जहाजरानी उद्योग या समुद्री समुदाय से जुड़े हैं।
उन्होंने कहा कि सभी देशों का साझा हित यह सुनिश्चित करना है कि जहाजों पर हमले बंद हों और समुद्र में काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा बनी रहे। जायसवाल के मुताबिक, इस पहल का उद्देश्य संवाद के लिए एक मंच उपलब्ध कराना और समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा को वैश्विक विमर्श के प्रमुख मुद्दों में शामिल करना है।
उन्होंने आगे कहा कि भारत विभिन्न देशों और संबंधित पक्षों को एक साथ लाकर अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना चाहता है, ताकि वाणिज्यिक जहाजरानी बाधित न हो, जहाजों को निशाना न बनाया जाए और समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
शिमला समझौते के बाद यूएनएमओजीआईपी की प्रासंगिकता खत्म: भारत
भारत और पाकिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सैन्य पर्यवेक्षक समूह (यूएनएमओजीआईपी) की भूमिका को लेकर पूछे गए सवाल पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि इस मामले में भारत का रुख लगातार एक जैसा रहा है।
रणधीर जायसवाल ने कहा, “भारत और पाकिस्तान के बीच हुए शिमला समझौते के बाद यूएनएमओजीआईपी की प्रासंगिकता खत्म हो चुकी है।”
गंगा जल समझौते पर संयुक्त नदी आयोग के तहत चर्चा
1996 की गंगा जल बंटवारा संधि के बारे में पूछे जाने पर जायसवाल ने कहा कि नदी और जल से जुड़े सभी मुद्दों पर संयुक्त नदी आयोग के ढांचे के तहत चर्चा की जाती है।
उन्होंने बताया कि भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार पर संयुक्त कार्य समूह की बैठक नई दिल्ली में गुरुवार और शुक्रवार को हुई। जायसवाल ने कहा कि उन्हें निश्चित जानकारी नहीं है कि बैठक समाप्त हो चुकी है या नहीं। उनके अनुसार, बातचीत हाल ही में समाप्त हुई हो सकती है या उस समय जारी हो सकती है।
उन्होंने बताया कि बैठक का नेतृत्व संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारियों ने किया। इसमें व्यापार से जुड़े मुद्दों और दोनों देशों के द्विपक्षीय एजेंडे में शामिल विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।
भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे पर बातचीत जारी
भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) की अगली बैठक को लेकर सवाल पूछे जाने पर रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत इस पहल को काफी महत्व देता है और इससे जुड़े सभी पक्षों के साथ बातचीत कर रहा है।
उन्होंने कहा कि फिलहाल उनके पास आईएमईसी की अगली बैठक की तारीख को लेकर जानकारी नहीं है। हालांकि, इस पहल में भाग लेने वाले देशों के विवरण सहित कोई भी नई जानकारी उपलब्ध होने पर उसे साझा किया जाएगा।
सऊदी अरब में हमलों की भारत ने की निंदा
सऊदी अरब में हालिया हमलों के बारे में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि इन घटनाओं के कारण कुछ व्यवधान पैदा हुए हैं। भारत ने नागरिक बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की है।
जायसवाल ने कहा कि संपर्क व्यवस्था से जुड़ी किसी अन्य समस्या की जानकारी उनके पास नहीं है। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में विभिन्न हवाई अड्डों के जरिए हवाई यातायात जारी है।
अमेरिका ने कई कंपनियों के पीईआरएम आवेदनों पर लगाई रोक
अमेरिकी श्रम मंत्री कीथ सोंडरलिंग ने गुरुवार को घोषणा की थी कि कई प्रमुख प्रौद्योगिकी और आईटी आउटसोर्सिंग कंपनियों को पीईआरएम कार्यक्रम से निलंबित किया जा रहा है। इसके पीछे उन्होंने कई सक्रिय संघीय जांच का हवाला दिया था।
जिन कंपनियों के नाम सामने आए, उनमें कॉग्निजेंट, इन्फोसिस, टाटा, विप्रो, एचसीएल और कैपजेमिनी के अलावा अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियां माइक्रोसॉफ्ट और एडोबी भी शामिल हैं।
सोंडरलिंग ने कहा कि अमेरिकी श्रम विभाग इन कंपनियों से जुड़े स्थायी श्रम प्रमाणन के नए आवेदन स्वीकार नहीं करेगा और पहले से लंबित आवेदनों की प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ाएगा।
अमेरिकी श्रम मंत्री ने दावा किया कि इन कंपनियों ने सामूहिक रूप से लाखों विदेशी कर्मचारियों के लिए अनुरोध किया और उन्हें बड़ी संख्या में एच-1बी वीजा की मंजूरी तथा स्थायी श्रम प्रमाणन मिले।
सोंडरलिंग के अनुसार, 2009 से अब तक केवल इन कंपनियों ने लगभग 30 लाख विदेशी कर्मचारियों के लिए अनुरोध किया है। उन्हें 2.30 लाख से अधिक एच-1बी वीजा की मंजूरी और एक लाख से अधिक स्थायी श्रम प्रमाणन मिले हैं।
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