जीएसटी काउंसिल के बड़े फैसले: कारोबारियों को राहत, नोटिस और गिरफ्तारी के नियम बदले

HIGHLIGHTS
- जीएसटी अधिकारियों को कारोबारी की गिरफ्तारी के लिए कोर्ट से आदेश लेना होगा।
- दंडात्मक कार्रवाई के लिए जीएसटी बकाये की सीमा एक करोड़ से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये की गई।
- 10,000 रुपये से कम के बकाये पर अब नोटिस जारी नहीं किया जाएगा।
- इस बदलाव से 12 लाख से अधिक कारोबारियों को राहत मिलेगी।
नई दिल्ली। पिछले साल सितंबर में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरों में बदलाव करके सरकार ने ग्राहकों को बड़ी राहत दी थी। अब ठीक एक साल बाद गुरुवार को जीएसटी कानून के दुरुपयोग और इसकी जटिलताओं से परेशान कारोबारियों के लिए भी राहत का रास्ता खोला गया।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में नई दिल्ली में हुई जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक में मुख्य रूप से रजिस्ट्रेशन, रिफंड और रिटर्न से संबंधित मामलों में कारोबारियों को राहत देने की कोशिश की गई।
बैठक में सबसे बड़ा फैसला यह रहा कि अब जीएसटी अधिकारी केवल जीएसटी कानून का हवाला देकर किसी कारोबारी को गिरफ्तार नहीं कर सकेंगे। गिरफ्तारी के लिए उन्हें कोर्ट से आदेश लेना होगा।
पांच करोड़ से अधिक जीएसटी बकाया होने पर होगी कार्रवाई
किसी कारोबारी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई अब पांच करोड़ रुपये से अधिक जीएसटी बकाया होने पर ही की जाएगी। फिलहाल यह सीमा एक करोड़ रुपये थी। ये सभी फैसले अगले वित्त वर्ष से लागू होंगे और इस संबंध में जल्द अधिसूचना जारी की जाएगी।
अब तक मामूली रकम के बकाये पर भी कारोबारियों को नोटिस भेज दिया जाता था, जिसके बाद उन्हें जीएसटी अधिकारी और दफ्तर के चक्कर लगाने पड़ते थे। अब 10,000 रुपये से कम के बकाये पर कोई नोटिस जारी नहीं किया जाएगा। पहले भेजे गए इस तरह के नोटिस भी वापस ले लिए गए हैं। इससे 12 लाख से अधिक कारोबारियों को राहत मिलेगी।
इसके अलावा जीएसटी अधिकारियों को एक राज्य से दूसरे राज्य जाने वाले माल को कहीं भी चेकिंग के लिए रोकने का अधिकार नहीं होगा। उदाहरण के तौर पर अगर दिल्ली से माल बिहार जा रहा है तो उस गाड़ी को केवल दिल्ली या बिहार में ही चेकिंग के लिए रोका जा सकेगा। यह अधिकार भी विशेष टीम के पास ही होगा।
फिलहाल जीएसटी अधिकारी एक राज्य से दूसरे राज्य जाने वाले वाहनों को कहीं भी रोक लेते हैं, जिससे माल व्यापारियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
छोटे बकायों पर अब नहीं भेजा जाएगा नोटिस
बिना जोखिम वाले जीएसटी रजिस्ट्रेशन का काम फिलहाल तीन दिन में हो रहा है और इसमें किसी अधिकारी की मदद नहीं ली जाती। अब आवेदन प्रक्रिया को इस तरह तैयार किया गया है कि आवेदनकर्ता को किसी की सहायता की जरूरत नहीं होगी। आवेदन के दौरान ही उन्हें यह जानकारी मिल जाएगी कि कौन-कौन से दस्तावेज देने हैं।
रिटर्न में मामूली अंतर होने पर हर साल करीब 95,000 कारोबारियों को सिस्टम से जेनरेटेड नोटिस भेजे जाते हैं। रिटर्न की रकम में 0.8 प्रतिशत का अंतर होने पर भी कारोबारियों को नोटिस मिल जाता है। ऐसे नोटिस मामूली गलतियों को लेकर भेजे जाते हैं।
अब ऐसी गलतियों को सुधारने का अवसर दिया जाएगा। पंजीयन नंबर गलत होने की स्थिति में भी नोटिस आ जाता था, लेकिन अब उसे भी दोबारा सही करने का मौका मिलेगा। जीएसटी काउंसिल की बैठक में जीएसटी रेट को लेकर कोई चर्चा नहीं की गई।
रिफंड क्लेम स्वीकार करने की अवधि 15 से घटकर 10 दिन
रिफंड क्लेम स्वीकार करने की समयसीमा को 15 दिन से घटाकर 10 दिन कर दिया गया है। यदि 10 दिनों के भीतर जीएसटी विभाग की ओर से कोई प्राप्ति नहीं होती है तो माना जाएगा कि सरकार ने कारोबारी के रिफंड दावे को स्वीकार कर लिया है। जोखिम वाले क्लेम की जांच भी अब अधिकारी के बजाय सिस्टम करेगा।
रिफंड की प्रक्रिया तेज होने से कारोबारियों की कार्यशील पूंजी का प्रवाह बना रहेगा। लंबे समय तक रिफंड अटके रहने से छोटे कारोबारियों को काफी परेशानी होती है। सीजीएसटी के लिए इनकम टैक्स प्रणाली की तरह फेसलेस सुनवाई की व्यवस्था शुरू होगी। इसके दायरे में करीब 70 लाख कारोबारी आएंगे।
जीएसटी बैठक में ये अहम फैसले भी लिए गए
सामान्य जुर्माने की राशि 25 हजार रुपये से घटाकर 10 हजार रुपये कर दी गई।
टैक्स डिमांड 10,000 रुपये से कम होने पर कोई नोटिस जारी नहीं किया जाएगा।
ई-कामर्स प्लेटफॉर्म पर छोटे विक्रेताओं के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया आसान की जाएगी।
जीएसटी दरों में बदलाव पर साल में एक बार विचार किया जाएगा।
जोखिम आकलन के आधार पर ज्यादातर रिफंड तीन कार्य दिवस में मंजूर किए जाएंगे।
आपूर्तिकर्ता की ओर से कर का भुगतान नहीं किए जाने पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) से जुड़े मामलों की जांच के लिए अधिकारियों की समिति गठित की जाएगी। यह समिति तीन महीने में रिपोर्ट सौंपेगी।
प्लांट और मशीनरी तथा इनपुट सेवाओं पर जमा आइटीसी का रिफंड अब उपलब्ध होगा।
नियोक्ता कर्मचारियों के लिए लिए गए हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पर आइटीसी का दावा कर सकेंगे।
माल ले जा रहे वाहनों को रोकने के लिए वरिष्ठ अधिकारी की मंजूरी जरूरी होगी।
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