प्रदर्शनकारियों की सामूहिक हिरासत पर भारत का UN को जवाब, कहा- आंतरिक मामलों में दखल न दें

HIGHLIGHTS
- भारत ने OHCHR की चिंता को गलत संदर्भ पर आधारित बताया।
- रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में करीब 3,000 लोगों को हिरासत में लिया गया।
- जंतर-मंतर पर धरने की अनुमति के लिए दिया गया आवेदन खारिज हुआ था।
दिल्ली में शनिवार को हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने के मामले पर भारत और संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। प्रदर्शनकारियों की सामूहिक हिरासत पर संयुक्त राष्ट्र की चिंता के जवाब में भारत ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे देश के आंतरिक मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप बताया।
भारत ने कहा कि वह दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहां संविधान शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने का अधिकार देता है। देश में मजबूत संस्थागत व्यवस्था, स्वतंत्र न्यायपालिका और स्वतंत्र मीडिया भी मौजूद हैं, जो नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करते हैं। भारत ने यह प्रतिक्रिया सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने आधिकारिक अकाउंट ‘इंडिया एट यूएन’ के माध्यम से दी।
नई दिल्ली ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय को निष्पक्षता बनाए रखने की सलाह देते हुए कहा कि उसे दुनिया के अन्य हिस्सों में होने वाले बड़े प्रदर्शनों पर भी समान रूप से ध्यान देना चाहिए।
भारत ने OHCHR की चिंता पर जताई आपत्ति
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने दिल्ली में बड़े पैमाने पर हुए प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों, आंदोलन के नेताओं, नागरिक समाज संगठनों के सदस्यों, वकीलों और पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने की खबरों पर चिंता जताई थी।
इसके जवाब में भारत ने कहा कि संविधान के तहत शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार सुरक्षित है, लेकिन सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए इस अधिकार पर उचित प्रतिबंध लागू होते हैं। भारत के मुताबिक, कानून लागू करने वाली एजेंसियां कानूनी प्रावधानों के अनुसार काम करती हैं और शिकायतों के समाधान के लिए देश की अदालतें उपलब्ध हैं।
भारत ने अपने बयान में कहा कि OHCHR की चिंताएं गलत संदर्भ पर आधारित हैं और देश के आंतरिक मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप करती हैं। नई दिल्ली ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय से आग्रह किया कि वह निष्पक्षता और गैर-चयनात्मक रवैये के सिद्धांतों के अनुरूप दुनिया के अन्य हिस्सों में हो रहे बड़े प्रदर्शनों पर भी तुलनात्मक रूप से ध्यान दे।
दिल्ली में करीब 3,000 लोगों को हिरासत में लेने का दावा
यह विवाद दिल्ली में हुए एक विरोध प्रदर्शन के बाद शुरू हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने करीब 3,000 लोगों को हिरासत में लिया था। इनमें प्रदर्शनकारी, संबंधित राजनीतिक संगठन के समर्थक और विपक्षी नेता शामिल थे। ये सभी मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर धरना देने पहुंचना चाहते थे।
हालांकि, दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति के लिए दिए गए आवेदन को खारिज कर दिया था। इसके बाद राजधानी में प्रदर्शनकारियों की आवाजाही नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा और परिवहन संबंधी प्रतिबंध लगाए गए। प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पहुंचने से रोकने के लिए इंटरनेट और परिवहन सेवाओं पर भी पाबंदियां लगाई गईं। इनमें दिल्ली मेट्रो, बस और रेल सेवाओं से जुड़े प्रतिबंध शामिल थे।
दिल्ली पहुंचने के बाद प्रदर्शन से जुड़े नेता हिरासत में लिए गए
शनिवार सुबह मुंबई से दिल्ली पहुंचे सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके और दो अन्य नेताओं, सौरव दास तथा आशुतोष रांका को विमान उतरने के कुछ समय बाद हिरासत में ले लिया गया। पुलिस की कार्रवाई के बाद हिरासत में लिए गए अधिकांश लोगों को रिहा कर दिया गया।
UN ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान करने की अपील की
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के प्रवक्ता थामीन अल-खीथान ने शनिवार को जारी बयान में दिल्ली में बड़े पैमाने पर हुए प्रदर्शनों से पहले और उनके दौरान सामूहिक हिरासत की खबरों पर चिंता जताई। उन्होंने भारतीय अधिकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने के अधिकार का पूरी तरह सम्मान सुनिश्चित करने की अपील की।
संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों को आवश्यकता और आनुपातिकता की कड़ी कसौटियों पर खरा उतरना चाहिए। अल-खीथान ने कानून लागू करने वाले अधिकारियों से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान अधिकतम संयम बरतने का आग्रह किया। साथ ही, उन्होंने संबंधित चिंताओं को दूर करने के लिए सार्थक संवाद शुरू करने की सलाह दी।
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