'PoK में हिंसा पाकिस्तानी नीतियों का नतीजा', भारत ने इस्लामाबाद को सुनाई खरी-खरी

HIGHLIGHTS
- पीओजेके में जारी प्रदर्शनों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई को लेकर भारत ने पाकिस्तान की कड़ी आलोचना की है।
- विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया कि लोगों की मांगों का समाधान करने के बजाय पाकिस्तान बल प्रयोग और दमन की नीति अपना रहा है।
- रावलकोट में प्रदर्शन के दौरान छह लोगों की मौत की खबर के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है, जबकि भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ध्यान देने की अपील की है।
नई दिल्ली। पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में जारी विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई को लेकर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान पर स्थानीय लोगों की समस्याओं को नजरअंदाज करने और विरोध दबाने के लिए बल प्रयोग करने का आरोप लगाया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा कि पीओजेके में मौजूदा हालात पाकिस्तान के लंबे समय से चले आ रहे कथित अवैध नियंत्रण, प्रशासनिक नीतियों और लोगों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों का परिणाम हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों की मांगों पर बातचीत करने के बजाय वहां प्रशासन ने कठोर कार्रवाई का रास्ता अपनाया।
महिलाओं और बच्चों पर कार्रवाई का आरोप
भारत ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई में महिलाओं और बच्चों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। विदेश मंत्रालय ने इंटरनेट सेवाओं पर रोक, जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित होने और नागरिकों पर बल प्रयोग जैसी घटनाओं पर चिंता जताई।
रंधीर जायसवाल ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह पीओजेके में सामने आ रहे मानवाधिकार से जुड़े मामलों पर ध्यान दे और पाकिस्तान से जवाबदेही तय करने की मांग करे।
प्रदर्शन के दौरान छह लोगों की मौत का दावा
पीओजेके में मंगलवार को प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़कने की खबर सामने आई। रिपोर्टों के अनुसार, रावलकोट के मटियाल मीरा बस टर्मिनल के पास प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने की कोशिश के दौरान हुई गोलीबारी में छह लोगों की मौत हुई।
इससे पहले भी वहां सुरक्षा बलों की कार्रवाई में बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने के दावे किए गए हैं। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है।
इंटरनेट बंद और आर्थिक संकट को लेकर नाराजगी
स्थानीय लोगों ने लंबे समय से बंद इंटरनेट सेवा बहाल करने, सैन्य उपस्थिति कम करने और नागरिकों के खिलाफ बल प्रयोग रोकने की मांग उठाई है। प्रदर्शन में महिलाओं, बच्चों और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों के शामिल होने की बात सामने आई है।
क्षेत्र में आर्थिक परेशानियों और खाद्य संकट को लेकर भी लोगों में नाराजगी बढ़ने की खबर है। इसी मुद्दे को लेकर विदेशों में रह रहे पीओजेके मूल के लोगों ने भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की है।
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