जयशंकर और मार्को रुबियो की आज मुंबई में बैठक, भारत-अमेरिका संबंधों पर रहेगी नजर

HIGHLIGHTS
- मार्को रुबियो इस साल दूसरी बार भारत की यात्रा पर आ रहे हैं।
- अमेरिका भारत को ऊर्जा संसाधन बेचने के साथ रिफाइनरी उत्पादों की खरीद के विकल्प भी तलाश रहा है।
- जामनगर में रुबियो की रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रतिनिधियों के साथ अलग बैठक प्रस्तावित है।
नई दिल्ली। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो मंगलवार को मुंबई में द्विपक्षीय बैठक करेंगे। यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है, जब दोनों देशों के रिश्तों में पहले जैसी गर्मजोशी देखने को नहीं मिल रही है।
आईटी प्रोफेशनल्स से जुड़े मुद्दे, एच-1बी वीजा, ट्रंप प्रशासन की पाकिस्तान के साथ बढ़ती नजदीकी, रूस से तेल खरीदने का मामला और व्यापार वार्ता में आ रही बाधाओं समेत कई विषयों के कारण दोनों देशों के संबंधों में चुनौतियां बनी हुई हैं। डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद रिश्तों में सुधार की जो उम्मीदें थीं, वे अब तक पूरी नहीं हो सकी हैं।
ऐसे में जयशंकर और रुबियो की बैठक में दोनों देशों के बीच मतभेद वाले मुद्दों पर चर्चा कर समाधान तलाशने की कोशिश होगी। अधिकारियों के अनुसार, यह एक महत्वपूर्ण बैठक होगी, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
इस साल दूसरी बार भारत आ रहे हैं रुबियो
मार्को रुबियो इस साल दूसरी बार भारत की यात्रा पर आ रहे हैं। उनकी पिछली यात्रा मुख्य रूप से क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक पर केंद्रित थी। उस दौरान भारत के साथ अलग से सीमित बातचीत हुई थी। इस बार उनका एजेंडा भारत के साथ द्विपक्षीय रिश्तों को बेहतर बनाने और मजबूत करने पर केंद्रित है।
अधिकारियों का कहना है कि मंगलवार को होने वाली बैठक पहले की मुलाकातों से अलग होगी। इसमें क्वाड जैसे बहुपक्षीय मंच की भूमिका नहीं होगी, बल्कि दोनों देश सीधे तौर पर आपसी मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
ऊर्जा सहयोग और आपूर्ति श्रृंखला पर रहेगा फोकस
ट्रंप प्रशासन पहले ही संकेत दे चुका है कि रुबियो की भारत यात्रा में ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग महत्वपूर्ण रहेगा। अमेरिका भारत को ऊर्जा संसाधनों की आपूर्ति बढ़ाने के साथ-साथ रिफाइनरी उत्पादों, विशेषकर डीजल, के संभावित खरीदार के रूप में भी भारत को देख रहा है।
जयशंकर और रुबियो की बैठक में अमेरिका से ऊर्जा आयात, इस क्षेत्र में सहयोग और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने जैसे विषयों पर चर्चा होने की संभावना है।
बैठक के बाद रुबियो जामनगर जाएंगे। वहां उनकी रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रतिनिधियों के साथ अलग से मुलाकात होगी। इस दौरान अमेरिका में रिलायंस की ओर से रिफाइनरी स्थापित करने, वेनेजुएला से उत्पादित कच्चे तेल की खरीद और रिलायंस की रिफाइनरी से डीजल की आपूर्ति जैसे मुद्दों पर बातचीत होगी।
यह पहली बार है, जब अमेरिका के कोई विदेश मंत्री अपनी पूरी आधिकारिक टीम के साथ जामनगर जाएंगे। यहां रिलायंस की विशाल तेल रिफाइनरी स्थित है।
रक्षा साझेदारी और व्यापार पर भी होगी चर्चा
बैठक में रक्षा सहयोग को व्यापक बनाने का मुद्दा भी प्रमुख रहेगा। दोनों देश रक्षा क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने, संयुक्त उत्पादन और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर जोर दे रहे हैं।
इसके अलावा द्विपक्षीय व्यापार भी चर्चा के प्रमुख विषयों में शामिल होगा। दोनों पक्ष व्यापार संबंधी बाधाओं, टैरिफ और निवेश से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के रास्ते तलाश सकते हैं।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग, पश्चिम एशिया की स्थिति और रूस-यूक्रेन युद्ध पर भी बातचीत होने की संभावना है।
पश्चिम एशिया और रूस-यूक्रेन युद्ध पर भी चर्चा संभव
पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रम और इस क्षेत्र में भारत की भूमिका को लेकर दोनों देश अपनी समझ साझा कर सकते हैं। वहीं, रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत और अमेरिका के रुख में अंतर रहा है। ऐसे में इस मुद्दे पर भी दोनों पक्षों के बीच बेहतर समन्वय बनाने की कोशिश हो सकती है।
रिश्तों में आई खटास कम करने का मौका
जयशंकर और रुबियो की यह मुलाकात दोनों देशों के संबंधों में आई खटास को कम करने का महत्वपूर्ण अवसर मानी जा रही है। एच-1बी वीजा और भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स से जुड़े मुद्दों पर भी बैठक में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से चर्चा होने की संभावना है।
अब बैठक के बाद दोनों पक्षों की ओर से आने वाले बयानों और द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने की दिशा में उठाए जाने वाले कदमों पर नजर रहेगी।
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